Last Updated: September 26, 2026

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हुड़किया बौल : जब खेतों में गूंजती है उत्तराखंड की लोक आत्मा

June 26, 2026

हुड़किया बौल : जब खेतों में गूंजती है उत्तराखंड की लोक आत्मा

Uttrakhand Hudkiya Baul : चंपावत। पहाड़ों की सुरम्य वादियों, हरियाली से लहलहाते खेतों और लोक परंपराओं से समृद्ध उत्तराखंड की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। यहां की संस्कृति में रचे-बसे लोकगीत सदियों से लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।

क्या है हुड़किया बौल, क्या है खासियत

इन्हीं लोक परंपराओं में एक अनमोल धरोहर है ‘हुड़किया बौल’, जो खेती-बाड़ी के मौसम में खेतों में गूंजने वाला ऐसा लोकगायन है, जो केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि किसानों के उत्साह, श्रम और सामूहिकता का प्रतीक भी माना जाता है। आइए जानते हैं उत्तराखंड की इस अनूठी लोक-सांस्कृतिक परंपरा और उसके महत्व के बारे में। उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के किसान खेतों में काम करते समय एक पारंपरिक गीत गाते हैं। इसे ही हुड़किया बौल कहा जाता है। धान की रोपाई और निराई का काम करते समय इन गीतों को गाया जाता है। इस लोकगीत की खासियत यह है कि गाने के साथ-साथ इस दौरान नृत्य भी होता है।

किसानों में जोश भरता है ये बौल

खेतों में काम करते समय किसानों के जोश को बनाए रखने के लिए हुड़किया बौल गाया जाता है और लोग इस पर मिलकर नृत्य भी करते हैं। हुड़किया बौल गाने का एक खास तरीका होता है। इसमें मुख्य गायक होता है, जिसके हाथ में हुड़का नाम का एक वाद्य यंत्र होता है। इसे बजाते हुए वह लोकगीत के जरिए कोई पौराणिक कहानी सुनाता है। इस मुख्य गायक का साथ खेतों में काम करने वाली महिलाएं देती हैं। खेतों में धान की रोपाई कर रही महिलाएं मुख्य गायक की उन पंक्तियों को गाकर दोहराती हैं। दरअसल, इन गीतों में धरती, इंद्र देव और मेघ के देवताओं की गाकर वंदना की जाती है।

इंद्र देव प्रसन्न तो अच्छी बारिश

इससे जुड़ी मान्यता है कि अच्छी बारिश के लिए इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए हुड़किया बौल गाया जाता है। इंद्र देव की वंदना के अलावा, इन गीतों में वीर रस और हास्य रस से भरी गाथाएं भी गाई जाती हैं, जैसे- राजुला मालूशाही की मशहूर कहानी। हुड़िका बौल बिना हुड़का के नहीं गाया जाता। इस वाद्य यंत्र का आकार भगवान शंकर के डमरू जैसा होता है और इसे बजाने वाले कलाकारों को हुड़किया कहा जाता है। इस वाद्य यंत्र को लकड़ी से बनाया जाता है और इसके एक तरफ पशु की खाल मढ़ी जाती है। इसे उंगलियों की थाप से या एक पतली छड़ी से बजाते हैं। इसकी धुन इतनी मधुर होती है कि यह बहुत दूर तक सुनाई देती है। हुड़का का धार्मिक महत्व भी है। इससे जुड़ी मान्यता है कि इसका ताल देवताओं और पूर्वजों का आह्वान करने में मदद करती है।

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