नेशनल डेस्क। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पुराने श्रम कानूनों में बड़े बदलाव की घोषणा की। अब पुराने 29 श्रम कानूनों की जगह 4 नए लेबर कोड लागू हो गए हैं। इसकी जानकारी केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने एक्स (Twitter) पर साझा की। वहीं, सरकार का कहना है कि यह कदम कामगारों को सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक मजबूती देगा और कंपनियों के लिए भी काम करना आसान बनाएगा। आइये इसे विस्तार से जानते हैं…
नए श्रम सुधारों में प्लांटेशन वर्कर्स के सामजिक हित को मिलेगा बढ़ावा !
Labour Codes will Ensure Social Welfare for Plantation Workers!#श्रमेव_जयते #ShramevJayate pic.twitter.com/bDDLACo0bb
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) November 21, 2025
कौन से हैं ये 4 नए लेबर कोड?
सरकार ने जिन चार कोड को लागू किया है, वे हैं:
इन चार कोड में आजादी के बाद बने 29 पुराने कानूनों को मिला दिया गया है।
पुराने कानून क्यों बदले गए?
-पुराने कानून 1930–1950 के समय के थे
-उनमें आज की अर्थव्यवस्था और नए तरह के काम शामिल नहीं थे
-गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्क, प्रवासी श्रमिक जैसे शब्द नहीं थे
-नए नियमों से काम करने की पारदर्शिता बढ़ेगी और न्यूनतम वेतन देशभर में लागू होगा
हर कर्मचारी को मिलेगा नियुक्ति पत्र
अब देश की हर कंपनी को अपने कर्मचारी को जॉइनिंग के समय अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, कर्मचारियों का शोषण रुकेगा व नौकरी की शर्तें साफ होंगी।
40 करोड़ असंगठित कामगार होंगे सुरक्षित
सरकार का लक्ष्य है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी पीएफ (PF), ईएसआईसी (ESIC) व पेंशन जैसी सुविधाएं मिलें।
ग्रैच्युटी नियम में बड़ा बदलाव
पहले ग्रैच्युटी पाने के लिए 5 साल एक ही कंपनी में काम करना जरूरी था। लेकिन अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी (FTE) सिर्फ 1 साल काम करने के बाद भी ग्रैच्युटी के हकदार होंगे छोटे कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों को भी फायदा मिलेगा
ओवरटाइम पर दोगुना वेतन
नए नियमों के अनुसार तय समय से ज्यादा काम करने पर कर्मचारी को दोगुना वेतन मिलेगा। कंपनियों को समय पर वेतन देना अनिवार्य होगा ताकि आर्थिक परेशानी न हो
गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मान्यता
पहली बार इन शब्दों को कानून में शामिल किया गया। प्लेटफॉर्म वर्कर्स, गिग वर्कर्स (जैसे-कैब ड्राइवर, फूड डिलीवरी कर्मचारी)। इनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए कंपनियों (एग्रीगेटर्स) को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1–2% योगदान करना होगा
कौन-कौन आए नए कोड के दायरे में?
अब इन सेक्टर के कामगारों को भी फायदे मिलेंगे।
-बागान मजदूर
-डिजिटल और ऑडियो-विजुअल मीडिया वर्कर्स
-पत्रकार, डबिंग आर्टिस्ट, स्टंट पर्सन
-वस्त्र उद्योग (टेक्सटाइल)
-आईटी और आईटीईएस कर्मी
-बंदरगाह और निर्यात क्षेत्र में काम करने वाले
-साथ ही हर महीने की 7 तारीख तक वेतन देना अनिवार्य होगा। वहीं, साल में 180 दिन काम करने पर सालाना छुट्टी का हक मिलेगा।
खतरनाक उद्योगों के लिए सुरक्षा के नियम
-खदान और जोखिम वाले उद्योगों में ऑन-साइट सेफ़्टी मॉनिटरिंग
-500 से अधिक कर्मचारियों वाली जगहों पर सुरक्षा समितियां बनेंगी
विवाद निपटारे की नई व्यवस्था
-दो सदस्यों वाले औद्योगिक न्यायाधिकरण होंगे
-सुलह न होने पर सीधे न्यायाधिकरण में जा सकेंगे
-कंपनियों के लिए अब सिंगल लाइसेंस, सिंगल रजिस्ट्रेशन और सिंगल रिटर्न की सुविधा
सरकार का दावा क्या है?
सरकार का कहना है कि पुराने कानून विकास में बाधा थे। नए कोड मजदूर और कंपनियों दोनों को मजबूत करेंगे। इससे काम करने का माहौल सुरक्षित और आधुनिक बनेगा।
मांडविया का आया बयान
श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा यह श्रमिकों के हित में ऐतिहासिक फैसला है। इससे न्यूनतम वेतन, नियुक्ति पत्र और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। विरोध के बावजूद सरकार श्रमिकों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और राज्यों के साथ मिलकर काम करेगी।