नई दिल्ली/लंदन : भगौड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब लंदन स्थित हाईकोर्ट की किंग्स बैंच डिवीजन ने भारत में उनके प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ कार्यवाही फिर से शुरू करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया। इस मामले की पैरवी क्राऊन अभियोजन सेवा के वकील ने की, जिन्हें केंद्रीय जांच ब्यूरो की एक समर्पित टीम ने सहायता प्रदान की, जिसमें वे जांच अधिकारी भी शामिल थे, जो सुनवाई में सहयोग करने के लिए लंदन आए थे।
मामले को दोबारा खोलने के लिए आवेदन भंडारी फैसले के आधार पर दायर किया गया था, जो कि बचाव पक्ष के बिचौलिए संजय भंडारी के मामले में ब्रिटेन के एक हाईकोर्ट द्वारा दिया गया फैसला है। उस मामले में भंडारी ने तर्क दिया था कि अगर उन्हें भारत प्रत्यर्पित किया जाता है तो उन्हें यातना का सामना करना पड़ सकता है और अदालत ने मानवीय आधार पर उनके प्रत्यर्पण को अस्वीकार कर दिया था।
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