नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल काफी गरम हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मालदा में हुई घटना को लेकर BJP पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “खेल शुरू हो चुका है” और आने वाले दिनों में राजनीति और तेज होगी।
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बाहरी लोगों से पैसे देकर काम करवाया- ममता बनर्जी
ममता बनर्जी का कहना है कि मालदा में जो हिंसा हुई, वह अचानक नहीं थी बल्कि पहले से बनाई गई साजिश थी। उनके मुताबिक, कुछ बाहरी लोगों को मुंबई से बुलाया गया और उन्हें पैसे देकर यह काम करवाया गया। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जांच एजेंसी CID ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ऐसा करने में पीछे रही। यह घटना तब हुई जब मालदा के एक इलाके में हजारों लोगों की भीड़ ने एक सरकारी दफ्तर (BDO ऑफिस) को घेर लिया और सात न्यायिक अधिकारियों समेत कई कर्मचारियों को कई घंटों तक बंधक बना लिया। बाद में रात में उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया।
Harirampur | On Malda incident, West Bengal CM Mamata Banerjee says, “The DGP and SP have all been newly appointed. Everyone must stay vigilant so that riots and money laundering do not take place. We will return, and justice will be served for those incidents. The incident in… pic.twitter.com/RnSlOLet4N
— ANI (@ANI) April 3, 2026
BJP स्थिति का फायदा उठाना चाहती, ECI पर भी खड़े किए सवाल
इस घटना के पीछे की वजह मतदाता सूची में बदलाव को लेकर नाराज़गी बताई जा रही है। लोगों का आरोप है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं या हटाने की तैयारी हो रही है। ममता बनर्जी ने कहा कि BJP इस स्थिति का फायदा उठाना चाहती है। उन्होंने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादलों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सिर्फ बंगाल में ही सैकड़ों अधिकारियों को बदला गया, जिससे प्रशासन कमजोर हो सकता है। ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि BJP केंद्रीय बलों (CRPF) का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रही है। उन्होंने लोगों को सतर्क रहने को कहा और खासकर महिलाओं से अपील की कि वे वोटिंग के दिन “झाड़ू लेकर वोट डालने जाएं”- यह एक तरह का प्रतीकात्मक विरोध होगा।
मामले की जांच अब NIA को भी सौंपी गई
इस बीच, मामले की जांच अब NIA को भी सौंप दी गई है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया, जिसने कहा कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों को डराने की कोशिश हो सकती है। पुलिस और एजेंसियों ने अब तक इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कुछ राजनीतिक नेता और एक वकील भी शामिल हैं, जिसे मुख्य साज़िशकर्ता बताया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए वोटिंग 23 और 29 अप्रैल को होगी, जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे। ऐसे में इस घटना ने चुनाव से पहले राज्य की राजनीति को और गरमा दिया है।

