Big scam in Grahalakshmi Yojana: कर्नाटक सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गृहलक्ष्मी योजना’ को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि इस योजना के तहत करीब 1.48 लाख ऐसी महिलाओं के खातों में भी पैसे भेजे जाते रहे, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। इस गड़बड़ी के चलते लगभग 128 करोड़ रुपये गलत तरीके से भुगतान हो गए।
‘गृहलक्ष्मी योजना’ कर्नाटक सरकार की एक बड़ी कल्याणकारी योजना है, जिसके तहत परिवार की महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
यह पूरा मामला करीब 9 महीने पहले तब शुरू हुआ जब भागलकोट जिले में एक केस सामने आया। वहां पता चला कि एक मृत महिला के नाम पर भी पैसे उसके बैंक खाते में आते रहे, जिन्हें परिवार के सदस्य निकालते रहे। इसके बाद सरकार ने पूरी योजना की जांच कराने का फैसला किया। हाल ही में हुई आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं।
रिपोर्ट के अनुसार योजना में तीन बड़ी समस्याएं पाई गईं जिनमें मृत लाभार्थियों के खाते में पैसा: कई महिलाओं की मृत्यु के बाद भी उनके खातों में 2,000 रुपए की राशि भेजी जाती रही और परिजन उसका उपयोग करते रहे। गलत तरीके से योजना का लाभ: कुछ महिलाएं ऐसी भी पाई गईं जो अब इनकम टैक्स भरने या GST देने की श्रेणी में आ चुकी हैं, लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी अपडेट नहीं की और योजना का लाभ लेती रहीं। खाते की तकनीकी गड़बड़ी: कई लाभार्थियों के बैंक खातों से एक से ज्यादा मोबाइल नंबर जुड़े पाए गए, जिससे डिजिटल ट्रैकिंग और निगरानी में दिक्कत आई।
रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार ने पूरे लाभार्थी डेटाबेस की दोबारा जांच (रिव्यू) शुरू कर दी है। इधर विपक्षी दल बीजेपी और जेडीएस ने आरोप लगाया है कि रिव्यू के नाम पर करीब 1.10 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय जो महिलाएं लाभार्थी थीं, अब उन्हें अयोग्य घोषित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह वेरिफिकेशन प्रक्रिया केवल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सरकारी मदद सही और पात्र लोगों तक पहुंचे। उन्होंने माना कि योजना की शुरुआत में जल्दबाजी में कुछ गलतियां हुईं, जिन्हें अब सुधारा जा रहा है। उनका कहना है कि किसी भी वास्तविक लाभार्थी का नुकसान नहीं होगा।
गड़बड़ी को रोकने के लिए सरकार ने कई सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, जैसे- पूरे लाभार्थी डेटा का दोबारा सत्यापन, मृत्यु प्रमाण पत्र को बैंक खातों से जोड़ना और हर साल बायोमेट्रिक जांच या जीवन प्रमाण पत्र अनिवार्य करना।
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