Haryana-Rajasthan Yamuna Water Agreement today : नई दिल्ली। यमुना नदी के जल बंटवारे को लेकर हरियाणा और राजस्थान के बीच आज होने जा रहा समझौता केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि तीन दशक पुराने वादे को हकीकत में बदलने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
दोनों राज्यों में पानी की हिस्सेदारी तय
वर्ष 1994 में हुए यमुना जल समझौते के बाद पहली बार दोनों राज्यों के बीच जल हिस्सेदारी को धरातल पर उतारने की ठोस तैयारी पूरी हो चुकी है। प्रस्तावित एमओयू से न केवल जल प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी, बल्कि सिंचाई, पेयजल और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी वर्षों पुरानी उम्मीदों को भी नया आधार मिलेगा। इस नए कदम से जहां राजस्थान को उसके हिस्से का पानी मिलने का रास्ता साफ होगा, वहीं हरियाणा के कुछ इलाकों में भूजल स्तर को लेकर नई चिंताएं भी पैदा हो गई हैं। राजस्थान की प्यास बुझाने के लिए हथिनीकुंड बैराज से लेकर राजस्थान की सीमा तक करीब तीन सौ किलोमीटर लंबी एक भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी।
परियोजना पर खर्च होंगे 3900 करोड़
इस पूरी परियोजना पर लगभग 3900 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आने का अनुमान है। आज होने वाले समझौते में जमीन के अधिग्रहण, पाइपलाइन के निर्माण कार्य, इसकी नियमित निगरानी और भविष्य में इसके रखरखाव के खर्च को लेकर दोनों राज्यों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जाएंगी। राजस्थान के शेखावाटी इलाके के लोग लंबे समय से इस पानी की राह देख रहे थे, क्योंकि वहां भूजल का अत्यधिक दोहन हो चुका है और जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं।
राजस्थान को देंगे 33,379 क्यूसेक पानी
नए समझौते के प्रावधानों के अनुसार, राजस्थान को यमुना से 33,379 क्यूसेक पानी दिया जाना तय हुआ है। हालांकि, यह आपूर्ति केवल जुलाई से अक्टूबर के मानसून वाले महीनों के बीच ही की जाएगी। जल क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस पर व्यावहारिक चिंता जताते हुए कहा है कि यमुना नदी में क्षमता से अधिक पानी साल भर में मुश्किल से 25 से 30 दिन ही रहता है। ऐसे में राजस्थान को पूरे चार महीने तक लगातार और नियमित रूप से यह पानी मिल पाना जमीनी स्तर पर काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इस पूरी कवायद का एक दूसरा पहलू भी है, जो हरियाणा के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
फिलहाल हरियाणा खुद भी प्यासा
सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों और यमुना संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान यमुना का जो अतिरिक्त पानी अब तक हरियाणा की जमीन में रिसकर भूजल को रिचार्ज करता था, वह अब पाइपलाइन के जरिए राजस्थान मोड़ दिया जाएगा। इससे यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल जिलों में प्राकृतिक वाटर रिचार्ज की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का यह भी तर्क है कि हरियाणा खुद पानी की किल्लत से जूझ रहा है।
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