अंबाला छावनी : ‘एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन’ कार्यक्रम के तहत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस के टोल-फ्री नंबर पर मिली गुप्त सूचना के आधार पर अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए ट्रेन संख्या 15211 जन्नायक एक्सप्रेस से 10 बच्चों को रेस्क्यू किया। जानकारी के अनुसार, सूचना जिला युवा विकास संगठन अंबाला के प्रधान परमजीत सिंह बडोला को दी गई थी। उनके निर्देश पर स्टेट प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर अजय तिवारी ने महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समिति अंबाला, जिला बाल संरक्षण इकाई, जीआरपी, आरपीएफ और एएचटीयू अंबाला को तत्काल सूचना दी।
ट्रेन के रात करीब 9 बजे अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचने पर संयुक्त टीम ने चेकिंग अभियान चलाया और 10 लड़कों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। प्राथमिक पूछताछ में सामने आया कि बच्चे बिहार और उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। बच्चों के अनुसार, कुछ मामलों में ठेकेदारों ने 5,000 से 20,000 रुपये तक अग्रिम राशि तथा 12,000 से 18,000 रुपये प्रतिमाह मजदूरी देने का आश्वासन दिया था। बच्चों से काउंसलिंग के माध्यम से उनके परिवारों की पहचान और संपर्क की प्रक्रिया जारी है। जिला युवा विकास संगठन की टीम उनकी सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लगातार संपर्क में है।
आवश्यक डीडीआर एवं मेडिकल प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) अंबाला की चेयरपर्सन रंजीता सचदेवा के समक्ष पेश किया गया। समिति ने बच्चों को देखभाल एवं संरक्षण के लिए ओपन शेल्टर होम भेजने के निर्देश दिए, जहां उनकी काउंसलिंग और आवश्यक देखभाल की जाएगी। रेस्क्यू अभियान में आरपीएफ से एसआई पंकज कुमार, एससी सरवजीत, एसआई अंचल सिंह सहित अन्य पुलिसकर्मी तथा जिला युवा विकास संगठन से स्टेट प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर अजय तिवारी, लॉ इंटर्न माधव चोपड़ा, हरविंदर सिंह हुंदल, परगट सिंह, रुबेल और हरदीप सिंह नड़ियाली शामिल रहे।
जिला युवा विकास संगठन के प्रधान परमजीत सिंह बडोला ने कहा कि सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग को जानकारी दी गई, जिसके बाद पुलिस प्रशासन एवं संबंधित विभागों के समन्वय से त्वरित कार्रवाई कर 10 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। बडोला ने कहा कि बाल तस्करी और बाल श्रम बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य से जुड़ी गंभीर चुनौती हैं आंकड़ों के अनुसार देश में 5 से 14 वर्ष की आयु वर्ग में 43.53 लाख बाल श्रमिक दर्ज किए गए थे, जबकि हरियाणा में इसी आयु वर्ग में 53,492 बाल श्रमिक दर्ज किए गए थे। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए प्रशासन, पुलिस, संबंधित विभागों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय तथा समय पर सूचना देना जरूरी है।