
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के साथ लिव-इन संबंध में रह रहे युवक को सुरक्षा देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि नाबालिग के साथ किसी भी प्रकार का लिव-इन रिश्ता न केवल अनैतिक है, बल्कि पूरी तरह अवैध है और इसे संवैधानिक संरक्षण नहीं मिल स
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मामला यमुनानगर की 17 वर्षीय युवती और 27 वर्षीय युवक की याचिका से जुड़ा था। दोनों ने दावा किया था कि वे लिव-इन संबंध में रह रहे हैं और परिवारजन से खतरा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने इसी आधार पर सुरक्षा की मांग की। अदालत ने रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि युवती नाबालिग है, इसलिए यह संबंध कानून की दृष्टि में वैध नहीं है।
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार के वकील ने कहा कि नाबालिग के साथ लिव-इन न तो सामाजिक रूप से स्वीकार्य है, न ही कानूनी रूप से मान्य। उन्होंने दलील दी कि ऐसे रिश्तों को संरक्षण देना POCSO, बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के उद्देश्यों के विपरीत है। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि वैध लिव-इन संबंध केवल बालिग व्यक्तियों के बीच ही माना जाता है।
अदालत ने यह भी कहा कि नाबालिग के साथ किसी भी प्रकार की सहमति आधारित यौन गतिविधि भी कानूनन अपराध है। इसलिए ऐसे संबंध को सुरक्षा देना संभव नहीं है। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं द्वारा जताए गए खतरे को देखते हुए सीमित दिशा-निर्देश जारी किए।
अदालत ने आदेश दिया कि युवती को संबंधित एसएसपी के सामने पेश किया जाए। एसएसपी उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंपेंगे, जो उसकी सुरक्षा, देखभाल और निवास की व्यवस्था तय करेगी। साथ ही पुलिस को निर्देश दिया गया कि यदि किसी भी प्रकार का शारीरिक खतरा हो तो आवश्यक कदम उठाए जाएं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि युवक ने किसी कानून का उल्लंघन किया है,तो उसके विरुद्ध कार्रवाई करने में यह आदेश बाधा नहीं बनेगा। अंत में अदालत ने कहा कि नाबालिग का हित सर्वोपरि है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना न्यायालय का प्रथम दायित्व है।
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