Last Updated: October 27, 2026

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भाखड़ा का जलस्तर गिरा, हरियाणा-पंजाब की चिंता बढ़ी

October 27, 2026

भाखड़ा का जलस्तर गिरा, हरियाणा-पंजाब की चिंता बढ़ी

Low Dam Levels Raise Irrigation Concerns in Punjab, Haryana : चंडीगढ़। भाखड़ा बांध में पिछले साल के मुकाबले 38 फीट और पौंग बांध में 22 फीट कम पानी है जिसने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की चिंता बढ़ा दी है। बांधों में पानी की आवक भी कम हो रही है, जिससे आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

इसका सीधा असर रबी सीजन पर पड़ने की उम्मीद है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई तो किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जलापूर्ति और बिजली उत्पादन पर भी दबाव बढ़ सकता है। प्रदेश में रबी सीजन के तहत गेहूं और बाकी फसलों की बुआई एक नवंबर से शुरू हो जाएगी जो दिसंबर माह तक जारी रहेगी। यही कारण है कि तीनों राज्यों ने अभी से पानी की मांग भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड को भेज दी है लेकिन बोर्ड के पास इस साल मांग को पूरा करना बड़ी चुनौती है। बोर्ड ने सभी राज्यों से अपील की है कि वे अपनी पानी की मांग कम करें ताकि रबी सीजन के दौरान सिंचाई के लिए किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

भाखड़ा में जिस तरह से जलस्तर कम चल रहा है, उससे आगे संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पीने के पानी की आपूर्ति भी कम हो सकती है जिससे जल विवाद गहरा सकता है। पहले भी पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को लेकर विवाद हो चुका है। साथ ही बिजली के उत्पादन भी असर पड़ेगा। भाखड़ा बांध का जलस्तर इन दिनों 1632 फीट बना हुआ है जो पिछले साल के मुकाबले काफी कम है। अगर वर्ष 2025 की बात करें तो बांध का जलस्तर इन दिनों करीब 1670 फीट बना हुआ था। इसी तरह पौंग बांध का जलस्तर भी 1660 फीट है जो पिछले साल के दौरान इन दिनों में 1382 फीट चल रहा है। बांधों में इनफलो भी कम है।

भाखड़ा का इनफ्लो पिछले साल 12,759 क्यूसेक था जो फिलहाल 8500 क्यूसेक के आसपास है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में बांधों में पानी की किल्लत कम होने की जगह बढ़ेगी। बोर्ड के अधिकारियों अनुसार आम तौर पर वह भाखड़ा का जलस्तर 1505 फीट से नीचे नहीं लेकर जाते हैं। इसी तरह ही पौंग बांध का जलस्तर भी 1300 फीट तक बरकरार रखा जाता है। इस लिहाज से दोनों बांधों का जलस्तर काफी कम है। प्रदेश में आने वाले दिनों में सभी राज्यों की पानी की मांग बढ़ जाएगी।

पंजाब की मांग 30,000 क्यूसेक के करीब है जिसमें 20 क्यूसेक भाखड़ा और 10,000 क्यूसेक रावी-ब्यास से है। इसी तरह हरियाणा ने 7800 क्यूसेक और राजस्थान ने 10,000 क्यूसेक के करीब पानी की मांग की है। आगामी रबी सीजन के दौरान पानी की इस मांग में और भी वृद्धि हो सकती है। सूबे को इस साल पहले ही सूखे की मार का सामना करना पड़ा है। देशभर में राज्य सबसे अधिक प्रभावित रहा है। पंजाब में मानसून के दौरान 41 फीसदी कम बारिश हुई है जिसका असर पहले ही धान की खेती पर पड़ने की आशंका है लेकिन अब रबी सीजन पर भी संकट बढ़ने की आशंका है।

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