करनाल: अंतरिक्ष परी कल्पना चावला के पिता और वरिष्ठ समाज सेवी बनारसी दास चावला का 94 वर्ष की उम्र में आज निधन हो गया। वे करनाल में रहते थे उनका जन्म पाकिस्तान के शेखूपुरा में 1929 में हुआ था, विभाजन के बाद उनका परिवार करनाल में आ गया। अंतरिक्ष परी कल्पना चावला के पिता होने के साथ-साथ वे एक जाने माने समाजसेवी भी थे और कई संस्थाओं के साथ जुड़े हुए थे। मरणोपरांत भी उन्होंने अपनी देह को मेडिकल छात्रों के शोध के लिए दान कर दिया।कल्पना चावला को आगे बढ़ाने और शिक्षा से लेकर उसे शोध के लिए अमेरिका भेजने तक उन्होंने कल्पना चावला का पूरा सहयोग किया जिसकी बदौलत कल्पना भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बन पाई।
करनाल के वरिष्ठ समाजसेवी राजकुमार ने कहा कि उनका अपना व्यक्तित्व इतना महान था कि उनके प्रति श्रद्धा से सिर अपने आप झुकता है। जीवन प्रयन्त उन्होंने समाज की बेहतरी के लिए काम किया और मरने के बाद भी वो समाज के काम आ रहे हैं। विद्यार्थियों को मोटीवेट करना, गरीब बेटियों को कंप्यूटर व अन्य कोर्स निशुल्क करवाने और निशुल्क शिक्षा देने जैसे अनेक कार्य हैं जो उनके साथ जुड़े हैं। कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ जगदीश चंद्र दुरेजा ने कहा कि आज उनके पार्थिव शरीर का संस्कार करने के स्थान पर कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में दान दिया गया ताकि मेडिकल स्टूडेंट इस पर रिसर्च कर सकें। उन्होंने कहा कि सभी को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और देहदान का संकल्प लेकर मानवता की सेवा में योगदान देना चाहिए।
जीवन के कई साल उनके साथ बिताने वाले करनाल के नरेंद्र सिंह ने बताया कि 2014 में ही उन्होंने अपनी देहदान का संकल्प ले लिया था और उन्हें इस बाबत जिम्मेदारी दी थी कि वह उनके मरणोपरांत उनका देहदान करवाएं। आज उनका संकल्प पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि बनारसी लाल चावला जैसा जीवन बहुत कम लोग जीते हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक कार्यों को समर्पित कर दिया। कल्पना उनकी बेटी थी जिन्होंने उनका ही नहीं बल्कि करनाल और देश का नाम भी पूरे विश्व में चमकाया। इससे पूर्व उनके पार्थिव शरीर को निर्मल कुटिया गुरुद्वारा लाया गया जहाँ से मेडिकल कॉलेज को शोध के लिए सौंप दिया गया।
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