Last Updated: September 24, 2026

Dainik Savera Times Logo

जमीन घोटाला: सिस्टम की मिलीभगत पर 12 साल बाद अदालत का करारा प्रहार

December 21, 2025

जमीन घोटाला: सिस्टम की मिलीभगत पर 12 साल बाद अदालत का करारा प्रहार

करनाल। सरकारी जमीन को निजी बताकर हड़पने की सुनियोजित साजिश पर 12 वर्ष बाद अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने पंचायत से लेकर राजस्व व्यवस्था तक की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मॉडल गांव अरजाहेड़ी के बहुचर्चित भूमि घोटाले में नायब तहसीलदार समेत 13 लोगों को दोषी ठहराते हुए अदालत ने 5 से 7 वर्ष की साधारण कैद और प्रत्येक पर 40 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

ये भी पढ़ें: Punjab Weather:  पंजाब में सर्दी का कहर जारी… इन जिलों में हो सकती है बारिश, जानें मौसम का हाल

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू गोयल की अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि यह मामला किसी प्रशासनिक चूक का नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र का परिणाम है, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों, राजस्व अधिकारियों और दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़े लोगों की सक्रिय भागीदारी रही। कोर्ट ने निर्देश दिए कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और जांच व ट्रायल के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।

जुर्माना नहीं दिया तो बढ़ेगी सजा

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी जुर्माना जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी दोषियों से कुल 5 लाख 20 हजार रुपये की वसूली की जाएगी, जिसे राज्य को हुए नुकसान की आंशिक भरपाई माना गया है।

कौन-कौन दोषी करार

इस मामले में जिन 13 लोगों को दोषी ठहराया गया है, उनमें तत्कालीन सरपंच, सरपंच प्रतिनिधि, बीडीपीओ, नायब तहसीलदार, नंबरदार, दस्तावेज लेखक, प्रॉपर्टी डीलर और निजी व्यक्ति शामिल हैं। दोषियों में जय सिंह, ईश्वरी देवी, हरीश कुमार, कुलजीत सिंह डाहिया, करमबीर उर्फ करमवीर, राजेंद्र पाल, ईश्वर सिंह (पुत्र दीप चंद), करम सिंह, जसपाल, डालेल सिंह, देश राज, ईश्वर सिंह (नंबरदार) और राज कुमार उर्फ राजू के नाम शामिल हैं।

अदालत की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि सरकारी भूमि से जुड़े घोटाले न केवल विकास कार्यों को रोकते हैं, बल्कि आम जनता और निवेशकों के भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचाते हैं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में नरमी भविष्य में बड़े अपराधों को बढ़ावा दे सकती है, इसलिए कठोर दंड आवश्यक है।

क्या था पूरा मामला

अदालती रिकॉर्ड के अनुसार अरजाहेड़ी गांव में सरकारी जमीन को निजी संपत्ति दिखाने के लिए फर्जी आवंटन पत्र तैयार किए गए। इसके बाद झूठे खरीद-फरोख्त के दस्तावेज बनाए गए और राजस्व रिकॉर्ड में अवैध बदलाव कर जमीन पर कब्जा दिलाया गया। जांच में सामने आया कि यह पूरी प्रक्रिया योजनाबद्ध तरीके से की गई थी, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत रही।

तीन आरोपी सजा से बचे

पब्लिक प्रोसिक्यूटर अमृतपाल सिंह ने बताया कि इस केस में कुल 16 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। इनमें से दो आरोपियों रामप्रसाद और नानकी देवी की मृत्यु हो चुकी है, जबकि एक आरोपी पृक्षित फरार है, जिसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। शेष 13 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई है।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें