करनाल। जिला परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए सामने आया है कि मार्च माह में स्वीकृत दर्जनों विकास योजनाएं अब तक जमीन पर नहीं उतर सकीं। लगभग दस महीने गुजर जाने के बावजूद न तो कार्य पूरे हुए और न ही संबंधित ठेकेदारों को भुगतान मिल पाया। इस देरी ने ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं की रफ्तार को प्रभावित किया है।
शुक्रवार को आयोजित जिला परिषद की सामान्य बैठक में लंबित कार्यों और भुगतानों को लेकर विस्तृत मंथन हुआ। बैठक में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. पंकज ने परिषद सदस्यों को आश्वस्त किया कि सभी रुके हुए विकास कार्यों को आगामी तीन महीनों में पूरा कराया जाएगा, जबकि लंबित बिलों का निपटान एक माह के भीतर कर दिया जाएगा। परिषद ने प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
बैठक की अध्यक्षता जिला परिषद चेयरपर्सन प्रवेश कुमारी ने की। सदस्यों ने पूर्व प्रशासनिक ढिलाई के कारण योजनाओं के अटकने का मुद्दा उठाया और समयबद्ध क्रियान्वयन की मांग की।
इस दौरान एक अहम निर्णय लेते हुए जिला परिषद की न्यायपुरी स्थित भूमि पर सार्वजनिक पुस्तकालय के निर्माण को हरी झंडी दी गई, जिससे विद्यार्थियों और आमजन को शैक्षणिक सुविधा मिल सकेगी।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जिला परिषद के प्रस्तावित खर्चों हेतु बजट मांग सरकार को भेजने की स्वीकृति।
पिछली बैठक में स्वीकृत 224 योजनाओं में से 194 कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अंतिम अनुमोदन।
वार्ड नंबर 2, 10 और 16 से आए विकास प्रस्तावों को मंजूरी।
जिला परिषद के अधीन सड़कों की वार्षिक मरम्मत के लिए प्रशासनिक स्वीकृति।
पिछली बैठक की कार्यवाही की औपचारिक पुष्टि।
बैठक में इंद्री विधायक रामकुमार कश्यप, नीलोखेड़ी विधायक भगवानदास कबीरपंथी, असंध विधायक योगेंद्र राणा सहित जिला परिषद के सदस्य और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।