करनाल। गांव अमूपुर में पंचायत की छह एकड़ गैर-कृषि भूमि पर किसान ईश्वर चंद गर्ग द्वारा धोखे से आर्थिक लाभ लेने का मामला उजागर हुआ है। किसान ने जमीन को पट्टे पर लेकर ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर कृषि श्रेणी में दर्ज कराया और तीन साल तक गेहूं व धान सत्र में सरकारी लाभ लेता रहा। पंजीकरण के दौरान हुई लापरवाही में पटवारी की बड़ी गलती सामने आई, जिसने जमीन को गैर-कृषि श्रेणी में लॉक नहीं किया।
बुधवार को पंचायत भवन में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में शिकायत आने के बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर सिंह गंगवा ने संबंधित पटवारी की जांच कर तत्काल निलंबन का आदेश दिया है। साथ ही किसान से पूरी आर्थिक रिकवरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि तय राशि का भुगतान न होने पर किसान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
गांव सांभली के शिकायतकर्ता बलराज शर्मा ने आरोप लगाया कि गांव की सरपंच किरण पाल कौर और ग्राम सचिव की लापरवाही से यह हेराफेरी संभव हुई। जांच में सामने आया कि गांव सांभली की 33 एकड़ छह कनाल और अमूपुर की छह एकड़ जमीन का पोर्टल पर गलत पंजीकरण किया गया था। ईश्वर चंद गर्ग ने अमूपुर की ही छह एकड़ जमीन को पट्टे पर लेकर तीन लगातार सालों में लाभ उठाया।
कृषि विभाग के उप निदेशक और डीडीपीओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों ग्राम पंचायतों को नोटिस जारी किए गए हैं। मंत्री ने कहा कि गिरदावरी और पंजीकरण के समय जिम्मेदारी पटवारी की थी, और सबसे पहली लापरवाही उसी स्तर पर हुई है। उन्होंने निर्देश दिया कि उस समय ड्यूटी पर तैनात पटवारी की रिपोर्ट पेश कर उसे निलंबित किया जाए और पंजीकरण प्रक्रिया में संलिप्त सभी लोगों की भूमिका भी जांची जाए।