करनाल। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से बनाई जा रही माइक्रोबायोलॉजी फूड टेस्टिंग लैब छह महीने बीतने के बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। जून 2025 में शिलान्यास के समय अधिकारियों ने दावा किया था कि लैब अधिकतम छह महीने में तैयार कर दी जाएगी, लेकिन मौजूदा हालात में निर्माण कार्य अपनी तय समय-सीमा से काफी पीछे चल रहा है। विभाग अब अनुमान लगा रहा है कि लैब को पूरी तरह तैयार होने में लगभग चार से पांच महीने का अतिरिक्त समय लगेगा।
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करीब 3.96 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन यह लैब अंबाला, पंचकूला, पानीपत, झज्जर, रेवाड़ी, नूंह, गुरुग्राम, मेवात, हिसार, फरीदाबाद और सोनीपत सहित 11 जिलों के खाद्य नमूने जांचने के लिए प्रस्तावित है। लैब में ऐसे उच्च स्तरीय उपकरण स्थापित किए जाएंगे, जो खाद्य पदार्थों में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और फंगस की पहचान तेजी से कर सकें। इससे मिलावट व संक्रमण से जुड़ी जांचों की विश्वसनीयता और गति दोनों बढ़ेंगी।
वर्तमान में करनाल में किसी उन्नत फूड टेस्टिंग लैब की सुविधा नहीं है, जिसके चलते नमूनों को बाहर भेजना पड़ता है। नई लैब शुरू होने पर न सिर्फ करनाल, बल्कि आसपास के जिलों में भी खाद्य सुरक्षा संबंधी जांचों में तेजी आएगी।
किन बैक्टीरिया की होगी जांच
यह लैब साल्मोनेला, लिस्टेरिया, ई-कोलाई, स्टैफिलोकोकस ऑरियस, बैसिलस सीरियस और क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की पहचान करने में सक्षम होगी। ये बैक्टीरिया फूड पॉयजनिंग, उल्टी-दस्त और गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। समय पर इनकी जांच होना जनस्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
अधिकारियों ने बताई देरी की वजह
जिला लोक एवं सह खाद्य विश्लेषक पूनम मुदगिल ने बताया कि “निर्माण कार्य अभी अधूरा है और काम की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए लैब को पूरी तरह तैयार होने में चार से पांच महीने और लग सकते हैं। लैब शुरू होते ही 11 जिलों के नमूनों की जांच स्थानीय स्तर पर संभव हो जाएगी।”