करनाल। जिले में धान खरीद के दौरान हुए बड़े घोटाले में कार्रवाई तेजी पकड़ चुकी है। जांच में सामने आए करीब 20 करोड़ रुपये के धान गबन के बाद विभाग और पुलिस दोनों स्तर पर दबाव बढ़ा है। मंगलवार को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग हरियाणा के महानिदेशक अंशज सिंह ने चार निरीक्षकों और एक सहायक निरीक्षक को निलंबित कर दिया। अब तक 10 अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो चुकी है, जबकि पांच आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस अब तक 5.25 लाख रुपये बरामद कर चुकी है।
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इसी बीच जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि खाद्य आपूर्ति विभाग के पांच, हैफेड के तीन और मार्केटिंग बोर्ड के दो अधिकारी अनियमितताओं में शामिल थे। जिले के अलग-अलग थानों में कुल छह एफआईआर दर्ज हैं। शहर थाना क्षेत्र में दर्ज फर्जी गेट पास मामले में मंडी सुपरवाइजर पंकज तुली, कंप्यूटर ऑपरेटर अंकुश और अंकित की गिरफ्तारी हुई। तुली से पांच लाख, जबकि दोनों ऑपरेटरों से 25 हजार रुपये बरामद किए गए। वहीं असंध पुलिस ने 9.25 करोड़ रुपये के गबन मामले में मिल मालिक शीशपाल और सहयोगी सुनील गोयल को पकड़ा, हालांकि इनके पास से कोई माल बरामद नहीं हुआ।
सरकार द्वारा कराए गए भौतिक सत्यापन में पांच राइस मिलों के स्टॉक में भारी गड़बड़ी सामने आई थी। यहां 18.92 करोड़ रुपये मूल्य का धान कम पाया गया था। पुलिस जांच में गबन की कुल राशि 20 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। पुलिस टीमों द्वारा मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु लगातार दबिश दी जा रही है।
निलंबित अधिकारियों में घरौंडा के निरीक्षक यशवीर सिंह, जुंडला के निरीक्षक संदीप शर्मा, करनाल मंडी के निरीक्षक समीर वशिष्ठ और निसिंग मंडी के निरीक्षक लोकेश शामिल हैं। ये सभी सलारू गांव स्थित बतान फूड्स में हुए 12,659.62 क्विंटल धान गबन मामले में आरोपी हैं। इस धान की कीमत 3 करोड़ 54 लाख 46 हजार 936 रुपये आंकी गई है। इनके खिलाफ सदर थाना पुलिस ने गबन की एफआईआर दर्ज की थी। सहायक निरीक्षक रामफल पर तरावड़ी थाना में मामला दर्ज है।
मार्केट कमेटी करनाल की निलंबित सचिव आशा रानी की अग्रिम जमानत याचिका पहले करनाल अदालत में खारिज हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने 20 नवंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने 28 नवंबर तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। अब 28 नवंबर को अगली सुनवाई निर्धारित है।
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