Last Updated: October 4, 2026

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Haryana: 14 दिन में इस गांव में 20 से ज्यादा मौतें, स्वास्थ्य विभाग सतर्क… जांच जारी

February 16, 2026

Haryana: 14 दिन में इस गांव में 20 से ज्यादा मौतें, स्वास्थ्य विभाग सतर्क… जांच जारी

हरियाणा: प्रदेश के पलवल जिले के छैंसा गांव में पिछले दो हफ्तों के दौरान 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही मौतों से गांव में डर और चिंता का माहौल है। आसपास के लोग भी यहां आने से घबराने लगे हैं और कुछ लोग इसे “मौत का गांव” तक कहने लगे हैं।

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क्या हैं बीमारी के लक्षण?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, शुरुआत में मरीजों में सर्दी, जुकाम और बुखार जैसे सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं। लेकिन कुछ मामलों में बाद में हालत गंभीर हो जाती है। जांच के दौरान कई लोगों में हेपेटाइटिस-बी संक्रमण की पुष्टि हुई है। कुछ अन्य लोगों की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।

गांव में लगाया गया स्वास्थ्य शिविर
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने गांव में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया है। डॉक्टरों की टीम घर-घर जाकर लोगों के ब्लड सैंपल ले रही है। इन सैंपलों की जांच पीलिया, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के लिए की जा रही है। जिन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है, उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया जा रहा है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

संक्रमण कैसे फैलता है?
स्वास्थ्य शिविर के नोडल अधिकारी वासुदेव गुप्ता के मुताबिक, हेपेटाइटिस-बी संक्रमित खून, संक्रमित सुई के इस्तेमाल और असुरक्षित यौन संबंधों से फैलता है। अधिकारियों को शक है कि कुछ मामलों में नशा करने के दौरान एक ही सुई का कई लोगों द्वारा इस्तेमाल किया गया हो सकता है। इसके अलावा प्रवासी मजदूरों और ट्रक चालकों से जुड़े जोखिम भरे व्यवहार को भी एक संभावित कारण माना जा रहा है।

ग्रामीणों का क्या कहना है?
गांव के कई लोगों का मानना है कि बीमारी की वजह दूषित पानी हो सकता है। उनका आरोप है कि गुरुग्राम नहर में औद्योगिक कचरा डाले जाने से पानी खराब हो गया है, जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने अभी तक पानी को बीमारी का कारण नहीं माना है और इस दिशा में भी जांच जारी है।

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इलाज में लापरवाही का आरोप
बीमारी से जुड़ा एक दुखद मामला भी सामने आया है। 14 साल के एक लड़के सारिक की हाल ही में मौत हो गई। उसके परिवार का आरोप है कि अस्पताल में समय पर सही इलाज नहीं मिला और आईसीयू बेड की कमी के कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
फिलहाल प्रशासन के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं, पहली, हेपेटाइटिस संक्रमण को फैलने से रोकना और दूसरी, दूषित पानी व स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान करना। गांव में बड़े स्तर पर जांच अभियान जारी है और स्वास्थ्य विभाग पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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