
पंचकूला। नगर निगम चुनाव की सरगर्मियों के बीच शहर की राजनीति बड़ी तेजी से बदल रही है। 5 जनवरी 2026 को निगम का कार्यकाल समाप्त होना है, इसलिए सभी दल पहले ही चुनावी मोड में आ चुके हैं। अब पूरा ध्यान सिर्फ आरक्षण प्रक्रिया पर टिक गया है, जिसे अचानक रोक दिया गया।
ये भी पढ़ें: सोनीपत में रोहित गोदारा गैंग के शूटर्स गिरफ्तार, देर रात हुई कार्रवाई
1 दिसंबर को पंचकूला, अंबाला और सोनीपत के लिए महापौर पद का ड्रा ऑफ लॉट होना था, लेकिन बैठक अंतिम समय में स्थगित कर दी गई। नई तारीख घोषित न होने से सियासत में असमंजस बढ़ गया है। महिला आरक्षित वार्डों को लेकर भी अनिश्चितता गहराने लगी है, क्योंकि कई दल विवादित वार्डों को आरक्षित करवाने की कोशिश में हैं।
सेक्टर–21 का वार्ड भाजपा के लिए सबसे मुश्किल मोड़ बनकर सामने आया है। यहां 10 से अधिक दावेदार टिकट की होड़ में हैं और बणिया बहुल आबादी के कारण पार्टी का आंतरिक संघर्ष और तेज हो गया है। वहीं पूरे कार्यकाल में उप महापौर और वरिष्ठ उप महापौर की कुर्सी खाली रहने से मौजूदा निगम व्यवस्था लगातार सवालों में रही।
इस बार मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर जैसा दिख रहा है। दूसरी ओर इनेलो, जेजेपी और आप भी वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। चुनाव से पहले फर्जी वोटरों का मामला सबसे बड़ा विवाद बन चुका है। पूर्व अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता इसे लेकर हाई कोर्ट पहुंच चुके हैं, जबकि विधायक चंद्रमोहन लगभग 40,000 फर्जी वोटरों का दावा कर रहे हैं।
पंचकूला, अंबाला और सोनीपत में से एक शहर का महापौर पद बीसी–बी श्रेणी के लिए आरक्षित होना है, जिसमें यादव, गुर्जर, सैनी और लोध जैसी जातियां शामिल हैं। आरक्षण प्रक्रिया रुकने से यह साफ नहीं है कि किस शहर को यह श्रेणी मिलेगी। राजनीतिक दलों की नजर अब सिर्फ ड्रा की नई तारीख पर टिकी है, जो पूरे चुनावी समीकरण को बदल सकती है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...