पानीपत। सिरसा से लापता हुई दो जुड़वा किशोरी बहनों का मामला मंगलवार को उस समय सामने आ गया, जब दोनों पानीपत रेलवे स्टेशन पर बदहवासी की हालत में बैठी मिलीं। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने पहले उन्हें अनदेखा कर दिया, लेकिन बाद में गश्त पर तैनात जीआरपी कांस्टेबल की नजर उन पर पड़ते ही मामला खुल गया।
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किशोरियों ने कांस्टेबल को बताया कि लगभग सात दिन पहले उन्हें तब उठा लिया गया था, जब वे घर के पास लड़की चुगने के लिए निकली थीं। परिवार ने घटना की शिकायत सिरसा सदर थाना में दर्ज कराई थी, जिसके बाद से वे लगातार उनकी तलाश कर रहे थे।
दोनों ने बताया कि अपहरण में दो महिलाओं समेत कुल सात लोग शामिल थे। उन्हें बेहोश हालत में पानीपत लाया गया और एक बंद कमरे में नजरबंद रखा गया। होश आने पर भी उन्हें कमरे से बाहर निकलने नहीं दिया गया और धमकाकर चुप रहने को कहा गया।
किशोरियों के मुताबिक अपहरणकर्ताओं ने उन्हें मेकअप किट थमाकर ‘तैयार होने’ का दबाव भी बनाया, जो उनकी मर्जी के खिलाफ था। लगातार डर और तनाव के बीच वे किसी तरह मौका पाकर वहां से निकल भागीं।
सड़क पर पहुंचने के बाद वे बिना दिशा जाने दौड़ती रहीं और पानीपत रेलवे स्टेशन पहुंच गईं। दोनों ने कई यात्रियों से फोन मांगकर स्वजनों को कॉल करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की।
आखिरकार प्लेटफॉर्म पर ड्यूटी दे रहे जीआरपी कांस्टेबल को देखकर वे रोते हुए उसकी ओर भागीं और पूरी घटना बताई। कांस्टेबल उन्हें तुरंत थाने ले गया, जहां उन्हें सुरक्षा में रखा गया।
जीआरपी ने तुरंत सिरसा पुलिस और परिजनों को सूचना भेजी। बाद में परिवारजन और सिरसा थाना पुलिस पानीपत पहुंचे। पुलिस ने दोनों के विस्तृत बयान दर्ज कर आरोपितों की पहचान को लेकर विशेष टीमें गठित कर दी हैं।
पुलिस का कहना है कि अपहरण का उद्देश्य अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन प्राथमिक जांच में यह मामला एक संगठित गिरोह की गतिविधि प्रतीत होता है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों बहनों को परिजनों के हवाले कर दिया गया।

