जींद जिले में पराली जलाने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे हवा और प्रदूषित हो रही है। मंगलवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 17 स्थानों पर धान अवशेष जलाने की पुष्टि हुई है। प्रशासनिक टीमों ने इन घटनाओं पर कार्रवाई तेज कर दी है। बढ़ते प्रदूषण ने लोगों को सांस लेने में अधिक परेशानी में डाल दिया है।
पुलिस ने पराली जलाने के आरोप में तीन किसानों—सोनू, सुरेंद्र और प्रदीप कुमार—को गिरफ्तार किया है। इन किसानों ने लगभग पांच एकड़ क्षेत्र में अवशेष जलाए थे। अधिकारियों के अनुसार, इन मामलों में पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी थी। फिलहाल सभी से पूछताछ की जा रही है और आगे की कार्रवाई जारी है।
इसी क्रम में दस अन्य किसानों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें गतौली, निडाना, किलाजफरगढ़, पौली, मालवी, खरैटी और देशखेड़ा गांव से किसान शामिल हैं। वहीं जिले में अब तक कुल 101 मामलों की शिकायत दर्ज हो चुकी है, जिन पर 3.70 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है। उचाना और नरवाना में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं
कृषि अधिकारियों के अनुसार, किसान गेहूं की बिजाई समय पर करने के लिए खेत खाली करने की जल्दबाजी में आग लगा देते हैं। विभागीय टीमों ने सभी स्थानों पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी है। कृषि विभाग ने किसानों से पराली न जलाने की अपील की है। अधिकारियों ने बताया कि सब्सिडी पर गाठं बनाने की मशीन उपलब्ध है, जिससे किसान अतिरिक्त आमदनी भी कमा सकते हैं।