कैथल: अतिरिक्त सैशन जज डा. नंदिता कौशिक ने भ्रष्टद्दाचार के एक मामले में एक जिला पार्षद और एक पार्षद प्रतिनिधि को सात-सात साल की कैद और एक लाख तथा 50 हजार रुपए जुमार्ने की सजा सुनाई है। इस बारे में बिजेन्द्र सिंह ठेकेदार निवासी हिसार ने एसीबी अंबाला में पीसी एक्ट की धारा 7, 7-ए, 13-ए/1/बी, 13/2, आईपीसी की धारा 384, 120 बी के तहत 18 जनवरी 2024 को मुकदमा नंबर 3 दर्ज करवाया था। शिकायत पक्ष्ी की ओर से मुकदमे की पैरवी एडीए कुलदीप गर्ग ने की।
एडवोकेट बलजिंद्र मलिक ने पैरवी में सहयोग किया। उन्होंने बताया कि ग्रीन नेटवर्क फर्म के संचालक विजेंद्र चहल ने जिला परिषद को वाटर टैंक और कूलर सप्लाई किए थे। वार्ड नंबर 11 के जिला परिषद सदस्य विक्रमजीत व वार्ड नंबर 3 की महिला पार्षद का पति भरत ढुल इसकी पेमेंट करवाने के लिए दस प्रतिशत कमीशन मांग रहे थे। यह रिश्वत दोनों ने ठेकेदार की ओर से 30 लाख रुपये के किए गए काम के बदले बिल पास करवाने की एवज में मांगे थे। बाद में इनकी एक लाख रुपए में सेटलमेंट हो गई।
शिकायत के अनुसार पार्षद विक्रमजीत कश्यप और भरत ढुल हरसौला ने कहा कि वे बिल पास करवा देंगे, लेकिन इसके लिए कुल राशि का 10 प्रतिशत लेंगे। ठेकेदार ने हामी भर ली। तीन किश्तों में यह राशि देने की बात तय हुई थी। रिश्वत की राशि की पहली किश्त एक लाख रुपये कैथल-करनाल रोड पर नेशनल हाईवे-152 के फ्लाईओवर के नीचे देनी तय हुई। जैसे ही बिजेंद्र ने दोनों को पैसे दिए, उसका इशारा मिलते ही एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने विक्रमजीत कश्यप और भारत हरसौला को उनकी कार में रिश्वत की राशि के साथ पकड़ लिया।
दोनों से 50-50 हजार रुपए बरामद हुए।
जब दोनों ने रुपयों की मांग की तो शिकायतकर्ता ने इनकी आवाज रिकॉर्ड कर ली थी। एसीबी ने दोनों को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विक्रमजीत पार्षद को सात साल की सजा व एक लाख रुपए जुमार्ना तथा भरत ढुल को भी सात साल सजा व 50 हजार रुपए जुमार्ना किया गया है। जुमार्ना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा रिश्वत लेना जनता के विश्वास के साथ सीधा धोखा है और ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है। बता दें कि इनको पार्षद के पद से भी हटाया जा चुका है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...