करनाल। पंचायत और कृषि विभाग के ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर फर्जीवाड़े नजर आ रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर श्मशान, स्कूल और गोचरान जैसी गैर कृषि योग्य जमीनों को खेती योग्य दिखाया जा रहा है।
अब ऐसे मामलों में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है। डीसी ने दो ग्राम पंचायतों सांभली और अमुपुर के सरपंचों को निलंबित कर दिया है। जांच में खुलासा हुआ कि जिन जमीनों पर कभी हल नहीं चला, उन बंजर और गैर-मुमकिन जमीनों को भी कागजों में लहलहाती फसलों से भरा दिखा दिया। फर्जी पंजीकरण के जरिए सरकारी खजाने को चूना लगाने का यह खेल पिछले दो सत्रों (2023-24 और 2024-25) से चल रहा था।
शिकायत के आधार पर की जांच में पाया कि पंचायतों ने नियमों को ताक पर रखकर ऐसी जमीनों पर धान और गेहूं की फसल दर्ज की, जो असल में खेती के लायक ही नहीं थी। इस पूरे घोटाले की सबसे अहम कड़ी एक आढ़ती और उसका परिवार है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक ग्राम पंचायत सांभली और अमुपुर की सरकारी जमीनों पर वास्तविक पट्टेदारों (जो लोग खेती कर रहे थे) के बजाय एक आढ़ती ईश्वर चंद, उसके बेटे नवीस और बहू पूनम के नाम पोर्टल पर दर्ज कर दिए गए।
भ्रष्टाचार का यह मामला तब प्रकाश में आया जब सांभली के पंच बलराज शर्मा ने 9 जुलाई 2025 को डीसी को शिकायत सौंपी। उन्होंने साक्ष्यों के साथ आरोप लगाया कि सरपंचों ने मिलीभगत कर सरकारी भूमि का दुरुपयोग किया है और निजी व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुंचाया है। शिकायत के बाद बीडीपीओ (निसिंग) और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों ने गहन पड़ताल की, जिसमें सरपंचों की संलिप्तता की पुष्टि हुई। दोषी पाए जाने के बाद डीसी ने अमुपुर और सांभली के सरपंचों को निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
आदेश के तहत पंचायतों की चल-अचल संपत्ति का प्रभार बहुमत वाले पंच को सौंपने को कहा गया है। प्रशासन ने इस मामले की अंतिम जांच के लिए उपमंडल अधिकारी, नीलोखेड़ी को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अगले 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए, जिससे कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके। इस कार्रवाई ने जिले की अन्य पंचायतों में भी हड़कंप मचा दिया है। जिला उपायुक्त ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी पोर्टल और सार्वजनिक संपत्ति के साथ धोखाधड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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