
बराड़ा : जिले में दिन का तापमान 33 डिग्री के पार पहुंच गया है। इससे गेहूं का दाना सूखने का भय है। पिछले साल भी मार्च में तापमान बढ़ने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार भी पैदावार कम हो सकती है। पिछले तीन दिनों से लगातार बढ़ रहे पारे ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
तापमान में एकाएक बढ़ोतरी होने लगी है। गेहूं की फसल को पहले बारिश की आवश्यकता थी, लेकिन धुंध ने इसका काम कर दिया। अब भी गेहूं की फसल को ठंड मौसम की आवश्यकता है, मगर मौसम ऐसे ही रहा तो गेहूं की फसल का दाना कमजोर हो जाएगा। पिछले साल भी मार्च में तेज गर्मी पड़ने लगी थी और गेहूं के उत्पादन में कमी आई थी।
बढ़ने लगा गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग :
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, केन्द्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रलय तथा खंड बराड़ा की संयुक्त टीम द्वारा क्षेत्र में गेहूं की फसल में संभावित पीले रतुआ (येलो रस्ट) रोग की स्थिति का आकलन करने के लिए विशेष सर्वे अभियान चलाया गया।
वनस्पति सरंक्षक अधिकारी डॉ. मनोहर चंद व डॉ. जमूना नेगी, कृषि विकास अधिकारी बराड़ा विनय आदि की टीम ने बराड़ा क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा कर खेतों में खड़ी गेहूं की फसल का निरीक्षण किया और किसानों को रोग की पहचान व रोकथाम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सर्वे के दौरान गांव अलावलपुर के किसान नरेश कुमार के खेतों में गेहूं की फसल में पीले रतुआ रोग के शुरूआती लक्षण दिखाई दिए हैं। समय रहते नियंत्रण न करने पर फसल की पैदावार को प्रभावित कर सकता है।
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