नेशनल डेस्क: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले में दाखिल तीन जनहित याचिकाओं पर 29 जून को सुनवाई होने की संभावना है। इन याचिकाओं में मामले की निष्पक्ष जांच कराने और चढ़ावे के हिसाब-किताब की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। पहली जनहित याचिका में पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने, एक उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग गठित करने और मंदिर में आए चढ़ावे का ऑडिट भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से कराने की मांग की गई है।
इस्तीफे के बाद भी फैसले का इंतजार
मामले में आरोप सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि इन इस्तीफों पर अंतिम फैसला न्यास की अगली बैठक में लिया जाएगा। इसी बात को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि मामला इतना गंभीर है तो इस्तीफे स्वीकार करने के लिए अगली बैठक का इंतजार क्यों किया जा रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे कार्रवाई में देरी हो रही है और ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
जांच और कार्रवाई में देरी के आरोप
मामले के सामने आने के बाद से ही जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि शुरुआत में मामले पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई। बाद में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया और करीब 20 दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई। इसी तरह संबंधित पदाधिकारियों के इस्तीफे भी कई सप्ताह बाद सामने आए। अब ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि इन इस्तीफों पर चर्चा अगली बैठक में होगी, जो 11 जुलाई को प्रस्तावित है।
बैठक से पहले बढ़ी चर्चा
बैठक में देरी को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि कार्रवाई में लगातार हो रही देरी से मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि सभी निर्णय नियमानुसार न्यास की बैठक में ही लिए जाएंगे। अब सभी की नजर 29 जून को संभावित सुनवाई और 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक पर है। इन दोनों घटनाओं के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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