Last Updated: October 13, 2026

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स्कूलों में फीस बढ़ाने पर हाईकोर्ट का फैसला, निदेशालय को झटका

May 23, 2026

स्कूलों में फीस बढ़ाने पर हाईकोर्ट का फैसला, निदेशालय को झटका

नई दिल्ली। शिक्षा निदेशालय को झटका देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने नई व्यवस्था कर दी है। हाईकोर्ट का कहना है कि प्राइवेट स्कूल और बिना सरकारी सहायता वाले मान्यता प्राप्त स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय से अनुमति की कानूनी जरूरत नहीं।

बेंच ने ये भी दिए आदेश

बेंच ने यह भी साफ कर दिया कि डीओई को सौंपे बयानों में स्कूलों की ओर से प्रस्तावित फीस में बढ़ोतरी 2027 के शैक्षणिक सत्र से ही लागू होगी। कहा कि किसी भी स्कूल को पिछले शैक्षणिक सत्रों के लिए फीस या अन्य चार्जेस का कोई भी बकाया मांगने या वसूली नहीं कर पाएगा। बेंच ने यह साफ किया कि जो स्कूल किसी एकेडमिक सेशन की शुरुआत में फीस बढ़ाते हैं। उन्हें सेशन शुरू होने से पहले डीओई को प्रस्तावित फीस का एक स्टेटमेंट जमा करना होगा।

इन स्कूलों को वित्तीय आजादी का हक

जस्टिस ने कहा कि प्राइवेट, बिना सरकारी मदद वाले और मान्यता प्राप्त स्कूलों को वित्तीय आजादी का हक रहेगा। शिक्षा निदेशालय का काम स्कूलों के रोजमर्रा वित्तीय कामकाज को डिक्टेट करना या ‘माइक्रो-मैनेज’ करना नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निजी, बिना सरकारी मदद वाले और मान्यता प्राप्त स्कूलों में फीस तय करने के मामले में डीओई के रेगुलेटरी अधिकार बहुत सीमित हैं और वे आम तौर पर दखल देने की इजाजत नहीं देते। कोर्ट ने कहा कि किसी स्कूल के खातों में सिर्फ ज्यादा पैसे होने के आधार पर डीओई यह नतीजा नहीं निकाल सकता कि स्कूल मुनाफाखोरी कर रहा है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा कि जहां कोई स्कूल चल रहे एकेडमिक सेशन के दौरान फीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखता है, तो उसे अपना प्रस्ताव DoE को उस तारीख से कम से कम दो महीने पहले जमा करना होगा, जिस तारीख से बदली हुई फीस लागू करने की मांग की जा रही है।

पहले प्रस्ताव हुए थे खारिज

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि डीओई को ऐसे प्रस्ताव पर उसी दो महीने के समय में फैसला करना होगा, ऐसा न करने पर प्रस्ताव को मंजूर माना जाएगा। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दिल्ली के 137 प्राइवेट स्कूलों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन स्कूलों ने वर्ष 2016-17 से 2022-23 के बीच समय-समय पर फीस बढ़ाने के प्रस्ताव दिए थे, जिन्हें शिक्षा निदेशालय (DoE) ने खारिज कर दिया था।

 

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