
शिमला: हिमाचल प्रदेश को इस साल सबसे भीषण मानसूनी आपदा झेलना पड़ा है, जिसने 1907 के बाद के सारे रिकॉर्ड को तोड़ते हुए भयंकर तबाही मचाई है। इस आपदा ने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 611 लोगों की जान ली तथा लगभग 4,800 करोड़ रुपए का नुक्सान पहुंचाया है। इस आपदा का सबसे दुखद पहलू मानवीय क्षति है, जिसमें भारी जनहानि हुई है। प्रारंभिक आंकड़ों से 611 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिसमें 427 मौतें सीधे आपदा से संबंधित घटनाओं में और 184 मौतें मानसून से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं में हुईं।
इस आपदा से 481 लोग घायल हैं और 88 लोग लापता हैं, जिससे राज्यभर के परिवार और समुदाय गहरे शोक और अनिश्चितता की स्थिति में हैं। इस त्रसदी ने राज्य में खेती-किसानी की रीढ़ तोड़ दी है। राज्य में 1,708 पशुओं और 46 पक्षियों के साथ-साथ 29,433 मुर्गियों की जान गई है। इससे बड़ी संख्या में परिवारों के लिए रोजी-रोटी का सवाल पैदा हो गया है। बाढ़ एवं अतिवृष्टि से नुक्सान 4754.5 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इस आंकड़े में निजी संपत्ति का विनाश भी शामिल है। राज्य के 1,012 पक्के और 2,287 कच्चे घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गये और 4,908 पक्के और 584 कच्चे घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे हजारों लोग बेघर हो गये। राज्य के कृषि और बागवानी क्षेत्रों को 704.8 करोड़ रुपये की भारी क्षति हुई है।
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