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108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल, प्रदेशभर में सेवा रही ठप

शिमला : हिमाचल के 108 और 102 के करीब 1400 कर्मचारियों ने प्रदेशभर में जोरदार प्र्दशन किया। शिमला में भी एंबुलेंस कर्मियों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। एबुलेंस कर्मी काम के बदले कम वेतन देने का आरोप लगा रहे हैं। कर्मियों का कहना है कि लगातार उन्हें शोषण का शिकार होना पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार से जल्द उनकी मांगें पूरा करने की मांग उठाई है। यूनियन ने नेशनल हेल्थ मिशन प्रदीप कुमार को बारह सूत्रीय मांग पत्र सौंपा और चेताया कि अगर कर्मचारियों को प्रताड़ित करना बंद न किया गया तो यूनियन के आह्वान पर कर्मचारी इस से भी बड़ी हड़ताल पर उतर जाएंगे।

उन्होंने मांग की है कि कर्मचारियों को सरकारी नियमानुसार न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जाए। बारह घंटे कार्य करने पर नियमानुसार डबल ओवरटाइम वेतन का भुगतान किया जाए। कर्मचारियों को नियमानुसार सभी छुट्टियों का प्रावधान किया जाए। गाड़ियों की मेंटेनेंस व इंश्योरेंस के दौरान कर्मचारियों का वेतन न काटा जाए व कर्मचारियों को पूर्ण वेतन का भुगतान किया जाए। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजेएम कोर्ट शिमला व श्रम विभाग के न्यूनतम वेतन के संदर्भ में आदेशों को तुरंत लागू किया जाए। प्रबंध निदेशक ने जल्द ही मांगों के समाधान का आश्वासन दिया है।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, राज्य उपाध्यक्ष जगत राम, जिलाध्यक्ष कुलदीप डोगरा, कोषाध्यक्ष बालक राम, जिला सचिव विवेक कश्यप व यूनियन महासचिव बालक राम ने कहा कि मुख्य नियोक्ता एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत मेडस्वेन फाउंडेशन के अधीन काम कर रहे सैंकड़ों पायलट, कैप्टन व ईएमटी कर्मचारी भयंकर शोषण के शिकार हैं। शोषण का आलम यह है कि इन कर्मचारियों को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन तक नहीं मिलता है। इन कर्मचारियों से बारह घंटे डयूटी करवाई जाती है परंतु इन्हें ओवरटाइम वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है।

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजीएम कोर्ट शिमला व श्रम कार्यालय के आदेशों के बावजूद भी पिछले कई वषों से इन कर्मचारियों का शोषण बरकरार है। जब मजदूर अपनी यूनियन के माध्यम से अपनी मांगों के समाधान के लिए आवाज बुलंद करते हैं तो उन्हें मानसिक तौर व अन्य माध्यमों से प्रताड़ित किया जाता है।
यूनियन के नेतृत्वकारी कर्मचारियों का या तो तबादला कर दिया जाता है या फिर उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित करके नौकरी से त्यागपत्र देने के लिए मजबूर कर दिया जाता है। कई कर्मचारियों को बिना कारण ही कई-कई महीनों तक ड्यूटी से बाहर रखा जाता है। उन्हें डराया धमकाया जाता है। उन्हें नियमानुसार छुट्टियां नहीं दी जाती हैं।

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