
शिमला (हिमाचल प्रदेश): राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में चालू मानसून सीजन में अब तक 370 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से 205 मौतें भूस्खलन, अचानक बाढ़, बादल फटने, डूबने, बिजली गिरने, करंट लगने और अन्य आपदाओं से जुड़ी बारिश से जुड़ी घटनाओं से जुड़ी हैं, और 165 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुई हैं।
एसडीएमए द्वारा जारी संचयी क्षति रिपोर्ट, जो 20 जून से 8 सितंबर तक की अवधि को कवर करती है, पहाड़ी राज्य में व्यापक विनाश की एक गंभीर तस्वीर पेश करती है। कुल 434 लोग घायल हुए हैं और 41 लापता हैं। इस आपदा में 1,480 पशुधन और 26,955 से अधिक मुर्गी पक्षियों की भी मृत्यु हुई है।
सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसमें 5,354 सड़कें, 83 जल आपूर्ति योजनाएँ और 7,002 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त या बाधित हुए हैं। सार्वजनिक संपत्ति को 4,12,246.97 लाख रुपये (4,122.46 करोड़ रुपये) का नुकसान होने का अनुमान है, जबकि घरों, दुकानों, फसलों और पशु आश्रयों सहित निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान हुआ है।
जिलावार आंकड़ों से पता चलता है कि मंडी में बारिश से संबंधित सबसे अधिक 37 मौतें हुईं, उसके बाद कांगड़ा (32), कुल्लू (26), और चंबा व शिमला (21-21) का स्थान रहा।
एसडीएमए ने चेतावनी दी है कि राज्य के कुछ हिस्सों में मानसून अभी भी सक्रिय है, और दुर्गम क्षेत्रों में बहाली के प्रयास जारी रहने के कारण मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
एसडीएमए ने अपने बयान में कहा, “इस मानसून में हुई तबाही का पैमाना हाल के वर्षों में अभूतपूर्व रहा है, चाहे वह मानवीय क्षति हो या बुनियादी ढाँचे को नुकसान।”
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 सितंबर को हिमाचल प्रदेश और पंजाब में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए वहां का दौरा करेंगे।
वह हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे।
दोपहर लगभग 1:30 बजे, प्रधानमंत्री मोदी हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा पहुँचेंगे, जहाँ वे अधिकारियों से मिलेंगे और स्थिति पर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी कांगड़ा में बाढ़ प्रभावित व्यक्तियों और एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा मित्र टीम से भी मिलेंगे।
इसके बाद, प्रधानमंत्री दोपहर लगभग 3 बजे पंजाब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। वे लगभग 4:15 बजे गुरदासपुर पहुँचेंगे, जहाँ वे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे और ज़मीनी हालात पर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
वे गुरदासपुर में बाढ़ प्रभावित व्यक्तियों के साथ-साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा मित्र टीम से भी बातचीत करेंगे।
प्रधानमंत्री की प्रत्यक्ष समीक्षा का उद्देश्य इस चुनौतीपूर्ण समय में दोनों राज्यों के लोगों की सहायता के लिए राहत और पुनर्वास प्रयासों की बारीकी से निगरानी करना है।
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