Last Updated: October 26, 2026

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HPU संशोधन विधेयक पर ABVP का विरोध, स्वायत्तता बचाने की मांग

September 5, 2026

HPU संशोधन विधेयक पर ABVP का विरोध, स्वायत्तता बचाने की मांग

ABVP Opposes HPU Amendment Bill : शिमला। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से पारित हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 की कड़े शब्दों में निंदा की है।

परिषद का कहना है कि सरकार पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर रोक के नाम पर विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्वायत्तता को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। विश्वविद्यालय कोई सरकारी विभाग नहीं हैं, बल्कि अपनी अलग शैक्षणिक आवश्यकताओं, शोध और कार्यप्रणाली के साथ काम करने वाली स्वायत्त संस्थाएं हैं। विश्वविद्यालयों में शिक्षक की नियुक्ति केवल लिखित परीक्षा के आधार पर नहीं हो सकती। एक शिक्षक के चयन में उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड, शोध, प्रकाशन, विषयगत ज्ञान और अनुभव का भी महत्व होता है। यूजीसी की नियुक्ति व्यवस्था में भी विश्वविद्यालय स्तर पर विषय विशेषज्ञों वाली चयन समिति का प्रावधान है।

ऐसे में सामान्य भर्ती परीक्षा की व्यवस्था को विश्वविद्यालयों की अकादमिक चयन प्रक्रिया पर थोपना गंभीर चिंता का विषय है। वर्तमान व्यवस्था में भी HPU, सरदार पटेल विश्वविद्यालय तथा कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालयों में शिक्षक भर्ती में 80 प्रतिशत अंक अकादमिक योग्यता और केवल 20 प्रतिशत साक्षात्कार के आधार पर होने की व्यवस्था है। आवेदन ऑनलाइन लिए जाते हैं और अकादमिक अंकों की प्रक्रिया भी पारदर्शी है। फिर सरकार बताए कि पारदर्शिता के नाम पर पूरी व्यवस्था बदलने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?

सरकार को ओडिशा और पंजाब के अनुभवों से भी सीखना चाहिए। उच्च शिक्षा में नियुक्ति की प्रक्रिया को केवल सामान्य परीक्षा तक सीमित करने के प्रयास पहले ही गंभीर कानूनी और व्यावहारिक प्रश्न खड़े कर चुके हैं। हिमाचल सरकार को दूसरों की गलतियों को दोहराने के बजाय उनसे सीखना चाहिए। एबीवीपी यह भी जानना चाहती है कि सरकार को ऐसी सलाह कौन दे रहा है, जो विश्वविद्यालयों की मूल प्रकृति और अकादमिक व्यवस्था का अध्ययन किए बिना ऐसे निर्णय सुझा रहा है, जिनसे सरकार की ही फजीहत हो रही है। क्या सरकार के सलाहकारों ने यूजीसी के नियमों और विश्वविद्यालयों की वर्तमान भर्ती व्यवस्था का अध्ययन किया है?

यदि किया है तो फिर विषय विशेषज्ञों वाली चयन व्यवस्था को बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी? एबीवीपी स्पष्ट करती है कि पारदर्शिता और जवाबदेही के नाम पर विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार को विधेयक पर पुनर्विचार कर विश्वविद्यालयों, शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए।

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