
धर्मशाला: तिब्बत की निर्वासित सरकार के मुखिया ने चीन के साथ तिब्बत मसले के समाधान के लिए सर्वोच्च धर्मगुरू दलाई लामा के मध्यमार्गीय सूत्र के प्रति आस्था जताते हुए कहा है कि तिब्बत मसले का समाधान दक्षिण एशिया में व्यापक शांति स्थापना का कारक बनेगा तथा इसके लिए भारत को भी मुखर होना चाहिए। देश के कूटनीतिक विषयों को कवर करने वाले पत्रकारों से एक मुलाकात में केन्द्रीय तिब्बत प्रशासन के निर्वाचित मुखिया (सिक्यांग) पेन्पा शेरिंग ने माना कि तिब्बत की निर्वासित सरकार एवं चीन की सरकार के प्रतिनिधियों के बीच पर्दे के पीछे से कुछ बातचीत चल रही है लेकिन उसमें प्रगति नगण्य है इसलिए इस बारे में खुलकर कुछ बताने के लिए नहीं है।
उन्होंने कहा, “हम मध्यम मार्गीय रास्ते का समर्थन कर रहे हैं जैसा कि परमपावन दलाई लामा ने सुझाया है। यदि तिब्बत के मसले का समाधान हो सका तो इससे समूचे दक्षिण एशिया में व्यापक तौर पर शांति आएगी।” सिक्यांग ने कहा कि चीनी नेतृत्व बहुत शंकालु है और हमारी अपेक्षाएं अधिक हैं इसलिए इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि चीन के भीतर की स्थिति के कारण भी प्रगति अवरुद्ध है। वहां भी चीनी नेतृत्व के भीतर गहरा अविश्वास भरा हुआ है। बहरहाल हमारा प्रयास सर्वश्रेष्ठ के लिए है लेकिन हमें सबसे खराब स्थिति के लिए भी तैयार रहना है।
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