Last Updated: September 30, 2026

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शिमला में वामपंथी पार्टियों का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी की मांग

September 30, 2026

शिमला में वामपंथी पार्टियों का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी की मांग

शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और वामपंथी पार्टियों के देशव्यापी आह्वान पर बुधवार को शिमला में डीसी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर रोक लगाने तथा इस प्रक्रिया के दौरान हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने की मांग उठाई।

प्रदर्शन में माकपा हिमाचल प्रदेश राज्य सचिव संजय चौहान, राज्य सचिव मंडल सदस्य प्रेम गौतम, जिला सचिव विजेंद्र मेहरा, शिमला लोकल कमेटी सचिव जगत राम, फाल्मा चौहान, आरपी सिंह, तमिलनाडु भाकपा नेता ए. भास्कर सहित पार्टी के कई नेता, कार्यकर्ता और नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शन को संजय चौहान, विजेंद्र मेहरा, जगत राम, आरपी सिंह, ए. भास्कर और मुकेश कुमार ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद सार्वभौमिक मताधिकार पर टिकी है। प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल करना और उसे मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया को लेकर देशभर में मतदाता सूचियों से पात्र नागरिकों के नाम हटाए जाने की आशंकाएं और सवाल सामने आ रहे हैं।

उन्होंने मांग की कि जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि प्रक्रिया के कारण किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर नहीं होगा, तब तक SIR को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, उन्हें तत्काल बहाल किया जाए और नाम हटाने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, कानूनी तथा सत्यापन योग्य होनी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि आयोग को किसी भी राजनीतिक दल या सरकार के प्रभाव से स्वतंत्र होकर काम करना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की मांग की।

वक्ताओं ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2023 में संसद द्वारा बनाए गए कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती लंबित है और 23 सितंबर 2026 को मामले में दो सदस्यीय पीठ का विभाजित फैसला आया है। वामपंथी पार्टियों ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने वाली चयन व्यवस्था की मांग दोहराई।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति को पद से हटाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि स्वतंत्र निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता के संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास से जुड़ा विषय है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनकी बर्खास्तगी की मांग की।

प्रदर्शन में बालक राम, विवेक कश्यप, महेश वर्मा, डॉ. राजेंद्र चौहान, डॉ. विजय कौशल, गोबिंद चितरांटा, भूपेंद्र सिंह, रंजीव कुठियाला, मुकेश, योगी सिंघानिया, पवन, विवेक नेहरा, प्रवेश, तिलक और विवेक बिरसांटा सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने भाग लिया।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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