शिमला: आखिरकार दो महीने के सूखे के बाद शिमला समेत प्रदेश के कई इलाकों में रविवार को जोरदार बारिश हुई। सुबह से धूप निकलने के बाद अचानक मौसम ने करवट बदली और काले बादलों ने पूरी घाटी को ढक लिया। देखते ही देखते झमाझम बारिश शुरू हो गई, जिससे ठंड ने एक बार फिर दस्तक दे दी। वहीं कुफरी, नारकंडा और मनाली के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी ने पर्यटकों को खूब लुभाया। रविवार सुबह शिमला में मौसम साफ था और लोगों को लग रहा था कि दिन गर्म रहेगा। लेकिन दोपहर करीब दो बजे अचानक पश्चिमी विक्षोभ सक्रीय हुआ और तेज हवाओं के साथ बादल छा गए।
शिमला शहर में करीब एक घंटे तक झमाझम बारिश हुई, जबकि कुफरी और नारकंडा के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अनुसार, शिमला, कुल्लू और मंडी जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कांगड़ा, सोलन, सिरमौर, चंबा, ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर में येलो अलर्ट है । विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटों में कई जगहों पर गर्जना के साथ बिजली कड़कने और ओले गिरने की संभावना है। मनाली के ऊंचाई वाले इलाकों में हुई बर्फबारी ने पर्यटकों को खूब आकर्षित किया।
अटल टनल के आसपास के इलाकों में सफेद चादर बिछ गई, जहां पर्यटकों ने स्नोबॉल फैंकने और तस्वीरें खींचने का आनंद लिया। सोशल मीडिया पर अटल टनल में बर्फबारी के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं ।पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के चेहरे भी खिल उठे हैं। उनका कहना है कि मैदानी इलाकों में गर्मी बढ़ने के कारण पर्यटकों का रुझान पहाड़ों की ओर बढ़ा है और इस बर्फबारी से होटलों की बुकिंग में इजाफा होगा। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि मार्च के आखिर तक अच्छी खासी भीड़ रहने की उम्मीद है।
हालांकि बारिश ने राहत दी है, लेकिन शिमला शहर में कई जगहों पर जलभराव की समस्या भी देखने को मिली। लोअर बाजार, कार्ट रोड और ढली के पास सड़कों पर पानी भर जाने से लोगों को परेशानी हुई। नालियों के चोक होने के कारण कई इलाकों में पानी सड़कों पर ही बहता रहा। नगर निगम शिमला के अधिकारियों का कहना है कि सफाई कर्मचारियों को तुरंत हटाने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगली बारिश से पहले सारी नालियों की सफाई कर दी जाएगी। दो महीने से सूखे का सामना कर रहे किसानों और बागवानों के लिए यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं है। प्रदेश में मार्च के पहले 12 दिनों में सामान्य से 98 फीसदी कम बारिश हुई थी, जिससे गेहूं की फसल और सेब के बगीचों पर खतरा मंडरा रहा था।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च महीने में होने वाली यह बारिश रबी फसलों के पकने के लिए काफी लाभदायक होती है। हालांकि ओले गिरने से फसलों को नुकसान की भी आशंका रहती है, लेकिन फिलहाल बारिश ने किसानों के चेहरे खिला दिए हैं। इस बीच, मौसम विभाग ने 19 मार्च के लिए कुल्लू, मंडी, शिमला और सोलन में मेघगर्जना और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है। इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रतार से तेज हवाएं चलने की आशंका है, जिससे किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।