
हिमाचल प्रदेश डेस्क: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) के तहत अपर्याप्त और देरी से मिल रही वित्तीय सहायता और PMGSY-4 फंड रोकने को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। साथ ही, उन्होंने शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में डॉक्टरों से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर भी बात की।
शिमला में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि 2023-24 के लिए PDNA के तहत ₹9,300 करोड़ के नुकसान का आधिकारिक तौर पर आकलन किया गया था, लेकिन केंद्र सरकार ज़रूरी रकम का सिर्फ़ एक छोटा सा हिस्सा ही दे रही है। सुक्खू ने कहा कि ₹9,300 करोड़ में से केंद्र सरकार सिर्फ़ ₹1,500 करोड़ दे रही है, जबकि राज्य सरकार ₹500 करोड़ का योगदान दे रही है। यह कुल अनुमानित नुकसान का मुश्किल से 15 प्रतिशत है। उन्होंने आगे कहा कि यह सीमित सहायता भी एक बार में जारी नहीं की जा रही है, बल्कि किस्तों में दी जा रही है, जिसे उन्होंने प्रभावी पुनर्वास और रिकवरी के लिए अनुचित और हानिकारक बताया।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राजनीतिक नेताओं से बाधाएं पैदा करना बंद करने और इसके बजाय केंद्र सरकार के साथ इस मामले को गंभीरता से उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “जो लोग सवाल उठाते रहते हैं, उन्हें जाकर घोषित फंड की मांग करनी चाहिए। केंद्र ने PMGSY-4 फंड भी रोक दिया है। यह न सिर्फ़ राज्य सरकार के साथ, बल्कि हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ भी अन्याय है।”
IGMC में डॉक्टरों के मुद्दे पर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले को संवेदनशीलता और ज़िम्मेदारी से संभाला है। उन्होंने कहा, “डॉक्टर हमारे परिवार का हिस्सा हैं। मैंने सीनियर डॉक्टरों से बात की और उनसे ड्यूटी पर लौटने को कहा, और मुझे खुशी है कि उन्होंने ऐसा किया है। उन्होंने बताया कि IGMC की रिपोर्ट की जांच के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा, और सरकार उसकी सिफारिशों के अनुसार सख्ती से कार्रवाई करेगी। सुक्खू ने आश्वासन दिया कि हमारी सरकार किसी का करियर बर्बाद करने नहीं आई है। संबंधित डॉक्टर ने अपनी गलती पर पछतावा दिखाया है। हम उचित प्रक्रिया का पालन करेंगे और सहानुभूतिपूर्ण और निष्पक्ष फैसला लेंगे।
मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर लगातार हिमाचल प्रदेश के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन नीतियों का असर आखिरकार राज्य के लोगों पर पड़ेगा। मैं इन सभी मुद्दों को उचित मंच पर केंद्र सरकार के सामने उठाऊंगा। सीएम ने दोहराया कि उनकी सरकार हिमाचल प्रदेश के हितों की रक्षा करने और शासन और प्रशासनिक फैसलों दोनों में निष्पक्षता, जवाबदेही और करुणा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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