हिमाचल डेस्कः प्रदेश में लागू की जा रही नई आबकारी नीति से शराब ठेकेदारों पर सख्ती बढ़ेगी। अब ठेकेदार आपसी सांठगांठ कर सस्ते में शराब की दुकानें हासिल नहीं कर सकेंगे। राज्य सरकार ने इस व्यवस्था को समाप्त करने के लिए ई-टेंडर प्रणाली के माध्यम से दुकानों की नीलामी करने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया के तहत देश के किसी भी कोने से इच्छुक व्यक्ति दुकानों के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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पहले स्थानीय स्तर पर सीमित प्रतिस्पर्धा के कारण कुछ ठेकेदार आपस में मिलीभगत कर दुकानों को कम कीमत पर ले लेते थे। अब बाहरी प्रतिभागियों के शामिल होने से बोली प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सरकार को अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद है।
पूलिंग सिस्टम पर लगेगी रोक
अब तक कई ठेकेदार समूह बनाकर बोली प्रक्रिया में एक-दूसरे के खिलाफ बोली नहीं लगाते थे। इस ‘पूलिंग सिस्टम’ के कारण सरकार को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप राजस्व नहीं मिल पाता था। नई आबकारी नीति में ई-टेंडर अनिवार्य किए जाने से यह व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और प्रत्येक दुकान का
आवंटन वास्तविक बाजार मूल्य पर होगा।
मुनाफे के साथ घाटे की दुकानें भी लेनी होंगी
नई नीति में शराब की दुकानों की यूनिट व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब ठेकेदारों को केवल मुनाफे वाली दुकानें ही नहीं, बल्कि घाटे में चल रही दुकानों को भी संबंधित यूनिट के साथ लेना अनिवार्य होगा। इससे वे चुनिंदा लाभकारी दुकानों तक सीमित नहीं रह पाएंगे और पूरे क्षेत्र में समान रूप से आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
पहले ठेकेदार आपसी मिलीभगत से लाभकारी दुकानें ले लेते थे, जबकि घाटे वाली दुकानों से विभाग को अपेक्षित राजस्व नहीं मिल पाता था। राज्य सरकार का मानना है कि नई आबकारी नीति से पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रदेश के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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