हिमाचल डेस्क: हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में इस बार अक्टूबर के पहले हफ्ते में ही बर्फबारी शुरू हो गई है, जिसने सामान्य मौसम चक्र को प्रभावित कर दिया है। बता दें कि लाहौल-स्पीति, चंबा और किन्नौर जिलों की ऊंची चोटियां अब बर्फ की सफेद चादर से ढक चुकी हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह असामयिक बर्फबारी पर्वतीय इलाकों में सर्दियों की शुरुआती झलक है और आने वाले हफ्तों में तापमान में और गिरावट का अनुमान है।
शिमला में भी मौसम ने ली करवट
शिमला जिले में भी मौसम ने करवट ली है। चांशल पीक पर इस सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि चंबा जिले में भारी बारिश और बर्फबारी ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पांगी उपमंडल, भरमौर और चुराह की ऊंची चोटियों पर भी बर्फ का मोटा परदा जम चुका है। इन क्षेत्रों में सड़कों और पैदल मार्गों पर बर्फबारी के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है।
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पिछले 24 घंटों के मौसम रिकॉर्ड पर नजर डालें तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में अचानक गिरावट दर्ज की गई है। कई स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से 6 से 14 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला गया है। निचले इलाकों में भी ठंड का असर महसूस किया जा रहा है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग हीटिंग और अन्य तैयारी के लिए अब सक्रिय हो गए हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी की चेतावनी जारी
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में और अधिक ठंड तथा पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार, लोग खासकर उच्च पर्वतीय इलाकों की यात्रा में सतर्क रहें और सड़क मार्गों की स्थिति की जानकारी लेकर ही निकलें। किसानों और पशुपालकों को भी पशुओं की सुरक्षा और फसल संरक्षण के लिए जरूरी इंतजाम करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘प्री-विंटर’ मौसम का प्रभाव है, जो हर साल अक्टूबर के मध्य या अंत में देखने को मिलता है। लेकिन इस बार यह असमय शुरू हो गया है, जिससे पर्यावरणीय और जनजीवन पर नया असर पड़ा है। हिमाचल के पर्वतीय इलाकों में सर्दी का यह शुरुआती दौर स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के लिए चुनौती लेकर आया है।

