Last Updated: October 6, 2026

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Himachal: IGMC शिमला में मरीज के गले से जिंदा निकाली 8 इंच लंबी जोंक, दिया जीवनदान

January 31, 2026

Himachal: IGMC शिमला में मरीज के गले से जिंदा निकाली 8 इंच लंबी जोंक, दिया जीवनदान

हिमाचल डेस्कः आईजीएमसी अस्पताल शिमला के डॉक्टरों ने एक व्यक्ति के गले में फंसी जिंदा जोंक को सफलतापूर्वक निकालकर उसकी जान बचा ली। मरीज पिछले 15 दिनों से सांस लेने में परेशानी और आवाज में बदलाव से जूझ रहा था। डॉक्टरों की टीम ने महज 20 मिनट में जटिल प्रक्रिया को अंजाम देकर उसे राहत दी। मरीज इससे पहले एमएमयू सोलन में उपचार के लिए गया था। डायरेक्ट लैरिंगोस्कोपी के दौरान डॉक्टरों को उसके गले में एक हिलती-डुलती वस्तु दिखाई दी, जिसके बाद मरीज को आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया।

सांस की नली के पास चिपकी थी जोंक

आईजीएमसी के आपातकालीन विभाग में पहले ईएनटी विशेषज्ञों ने मरीज की जांच की। जोंक निकालने के आवश्यक उपकरण उपलब्ध न होने के कारण मरीज को पल्मनरी विभाग भेजा गया। ब्रोंकोस्कोपी के दौरान पता चला कि जोंक सांस की नली के पास चिपकी हुई थी। उसे काटने या पकड़ने से यह खतरा था कि जोंक का कोई हिस्सा अंदर रह जाए या नीचे गिर जाए। ऐसे में डॉक्टरों ने सक्शन तकनीक का उपयोग कर जोंक को जिंदा बाहर निकाल लिया।

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डॉक्टरों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन

इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. डिंपल के. भगलानी ने किया। टीम में डॉ. राघव निरुला, डॉ. मयूर बग्गा, डॉ. निशांत और डॉ. कुमार सौरव शामिल रहे। तकनीकी सहयोग सुभाष बाली और अर्चना ने प्रदान किया। डॉक्टरों के अनुसार समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकी। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है।

15 दिन से परेशान था सिरमौर का मरीज

डॉ. डिंपल के. भगलानी ने बताया कि शुक्रवार को जिला सिरमौर के पच्छाद क्षेत्र के कांगेर धारयार गांव निवासी 55 वर्षीय सुरेश दत्त को आईजीएमसी रेफर किया गया था। मरीज की आवाज बदल गई थी और उसे लगातार गले में कुछ फंसे होने का अहसास हो रहा था। जोंक 15 दिनों से गले में फंसी हुई थी, इसलिए टीम ने सावधानी बरतते हुए सक्शन विधि से उसे बाहर निकाला। मरीज को इलाज के बाद घर भेज दिया गया है।

कैसे पहुंची गले में जोंक

परिजनों के अनुसार सुरेश दत्त ने कुछ दिन पहले नाले का पानी पिया था, इसी दौरान जोंक उसके गले में चली गई होगी।

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