शिमला : हिमाचल प्रदेश में इस मानसून ने भारी तबाही मचाई है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 30 जून से 6 अगस्त तक प्रदेश में बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और अन्य आपदाओं में 142 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 31 लोग अभी भी लापता हैं। इस अवधि में प्रदेश को 798.69 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। वहीं शुक्रवार शाम तक 162 सडक़ें, 105 बिजली ट्रांसफार्मर और 73 पेयजल योजनाएं प्रभावित रहीं।
रिपोर्ट के अनुसार आपदा में 224 लोग घायल हुए हैं। सबसे अधिक मौतें मंडी जिले में 39 दर्ज की गई हैं। इसके अलावा कांगड़ा में 21, शिमला में 18, कुल्लू में 20, चंबा में 15, बिलासपुर में 4, हमीरपुर में 3, किन्नौर में 5, लाहौल-स्पीति में 18, सिरमौर में 15, सोलन में 8 और ऊना में 8लोगों की जान गई है। मानसून से सबसे अधिक आर्थिक नुकसान भी मंडी जिले में हुआ है, जहां करीब 150.60 करोड़ रुपये की क्षति दर्ज की गई। इसके बाद शिमला (104.81 करोड़), चंबा (196.25 करोड़), कांगड़ा (194.38 करोड़), कुल्लू (86.10 करोड़), लाहौल-स्पीति (76.65 करोड़) और सिरमौर (72.79 करोड़) प्रमुख प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
सार्वजनिक संपत्ति के साथ-साथ लोगों की निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार 568 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त, 1,294 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त, 449 गोशालाएं, 954 पशुधन तथा करीब 7.04 करोड़ रुपये की फसलें प्रभावित हुई हैं। शुक्रवार शाम 6 बजे तक जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 162 सडक़ें बंद हैं। इनमें सबसे अधिक मंडी में 56, कुल्लू में 48, चंबा में 19, सिरमौर में 16 और शिमला में 14 सडक़ें बंद हैं। बिजली व्यवस्था भी प्रभावित है।
प्रदेश में 105 ट्रांसफार्मर ठप हैं, जिनमें लाहौल-स्पीति में 77, कुल्लू में 22, शिमला में 5 और चंबा में 1 ट्रांसफार्मर शामिल हैं। पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। 73 पेयजल योजनाएं बाधित हैं, जिनमें सिरमौर की 55, हमीरपुर की 9, शिमला की 6 और बिलासपुर की 3 योजनाएं शामिल हैं। बारिश के चलते कई क्षेत्रों में बहाली कार्य जारी है। प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
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