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हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर, अब तक 427 लोगों की मौत… 2,287 घर क्षतिग्रस्त; फसलों को भी भारी नुकसान

September 20, 2025

हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर, अब तक 427 लोगों की मौत… 2,287 घर क्षतिग्रस्त; फसलों को भी भारी नुकसान

शिमला: हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर लगातार जारी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के अनुसार, 20 जून से 20 सितंबर के बीच अब तक कुल 427 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 243 मौतें वर्षाजनित आपदाओं जैसे भूस्खलन, बाढ़, बिजली गिरने और डूबने के कारण हुई हैं, जबकि 184 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई है।

बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान

इस दौरान राज्य का सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एसडीएमए ने बताया कि 20 सितंबर तक कुल 394 सड़कें, जिनमें दो राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-03 और एनएच-503ए) शामिल हैं, पूरी तरह से अवरुद्ध हो चुकी हैं। इसके अलावा, 73 वितरण ट्रांसफार्मर (डीटीआर) भी खराब हो गए हैं, जिससे कई जिलों में बिजली सप्लाई बंद है। जलापूर्ति की 174 योजनाएं भी बंद पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी की समस्या बढ़ गई है।

जिलेवार नुकसान

जिलेवार आंकड़े बताते हैं कि कुल्लू (109 सड़कें), मंडी (140 सड़कें) और कांगड़ा (38 सड़कें) सड़क अवरोधों के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं। बिजली की सबसे गंभीर समस्या मंडी जिले में (11 डीटीआर खराब हुए) है, जबकि जलापूर्ति के मामले में मंडी (105 योजनाएं), शिमला (28 योजनाएं) और सोलन (10 योजनाएं) सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

अन्य नुकसान

इस भारी बारिश और आपदा में कुल 1,708 लोग घायल हुए हैं। 481 पशुओं की भी मौत हुई है, और 651 घर पूरी तरह से नष्ट हो गए, जबकि 1,012 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इसके साथ ही, 2,287 घर, 4,908 गौशालाएँ, 584 दुकानें, 58 श्रमिक शेड/झोपड़ियाँ और 7,048 अन्य छोटी संरचनाएँ भी बर्बाद हुई हैं।

कृषि और बागवानी को भारी नुकसान

इस मानसून ने कृषि और बागवानी को भी बहुत नुकसान पहुँचाया है। फसलों का कुल नुकसान ₹2,90,383.8 लाख और बागवानी में ₹1,45,771.9 लाख का नुकसान हुआ है। सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान ₹4,75,451 लाख से ज्यादा होने का अनुमान है, जिसमें सड़कें, जलापूर्ति योजनाएं, बिजली लाइनें, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे शामिल हैं।

मरम्मत का काम जारी

एसडीएमए ने कहा कि भारी बारिश के कारण सड़क क्षति, बिजली आपूर्ति में बाधा और पानी की योजनाओं के टूटने की समस्या बढ़ी है। मरम्मत का काम जारी है, लेकिन अधिकारियों ने माना है कि कई आंतरिक क्षेत्रों, विशेष रूप से कुल्लू, मंडी और शिमला में बार-बार भूस्खलन और अस्थिर ढलानों के कारण मरम्मत में मुश्किलें आ रही हैं। इस वर्ष का मानसून हिमाचल प्रदेश के लिए सबसे घातक साबित हुआ है, जिसमें भारी नुकसान हुआ है और कई लोग विस्थापित हो चुके हैं।

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