
शिमला: प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षकों की कमी को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सुक्खू सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संजय शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय औसत के आंकड़ों के जरिए शिक्षा क्षेत्र में अपनी उपलब्धियां गिनाने में जुटी है, जबकि जमीनी स्तर पर सरकारी स्कूलों में कई गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों में सामने आ रहे आंकड़े प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
150 से अधिक स्कूलों में शिक्षक नहीं होने का दावा
संजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश में 150 से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। उनके मुताबिक, यह स्थिति विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई और उनके शैक्षणिक भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने शिक्षा मंत्री से सवाल किया कि जब स्कूलों में शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं, तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार के दावों को किस आधार पर सही ठहराया जा रहा है।
3,315 विद्यालयों में एक अध्यापक के सहारे पढ़ाई
भाजपा प्रवक्ता ने एकल-शिक्षक विद्यालयों की संख्या को लेकर भी चिंता जताई। उनके द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 3,315 स्कूलों में केवल एक शिक्षक के जिम्मे पढ़ाई की व्यवस्था है। इनमें 3,214 प्राथमिक विद्यालय और 101 माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के लिए अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाना और शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में सरकार को शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
47,579 Students पर शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों का असर
संजय शर्मा ने रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि प्रदेश में 47,579 बच्चे ऐसे हैं, जिनकी पढ़ाई बिना शिक्षक वाले या एकल-शिक्षक विद्यालयों की परिस्थितियों से प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस दिशा में केवल घोषणाओं के बजाय ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
सरकारी स्कूलों में Enrollment और Dropout पर चिंता
भाजपा प्रवक्ता ने वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए सरकारी स्कूलों में नामांकन और स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों के आंकड़ों पर सवाल उठाए।
उनके अनुसार, 15 से 16 वर्ष आयु वर्ग में स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों का अनुपात 2.2 प्रतिशत से बढ़कर 3 प्रतिशत हुआ है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
प्रदेश सरकार पर सुधारों को लेकर निशाना
संजय शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलावों की बात की जा रही है, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय भाषाओं और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने की योजनाएं तभी प्रभावी होंगी, जब विद्यार्थियों को स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होंगे। भाजपा प्रवक्ता ने सरकार से शिक्षा संबंधी घोषणाओं के साथ-साथ उनके क्रियान्वयन की स्थिति भी सार्वजनिक करने की मांग की।
भाजपा ने स्कूलों के युक्तिकरण की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। संजय शर्मा ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने सरकारी विभागों में रिक्त पदों और भर्ती प्रक्रिया की गति को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए तेजी से कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और योग्य युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।
श्वेत पत्र की मांग, सरकार से मांगा जवाब
संजय शर्मा ने प्रदेश सरकार और शिक्षा मंत्री से शिक्षा व्यवस्था पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि शून्य-शिक्षकऔर एकल-शिक्षक विद्यालयों में नियमित अध्यापकों की नियुक्ति कब तक की जाएगी।
उन्होंने यह भी मांग की कि रिक्त पदों, शिक्षक नियुक्तियों और स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, ताकि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
BJP ने दी आंदोलन की चेतावनी
भाजपा प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शिक्षकों की कमी और सरकारी स्कूलों की समस्याओं को दूर करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो पार्टी इस मुद्दे पर आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस विषय पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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