Last Updated: November 1, 2026

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निरमंड के पर्वतारोही प्रशिक्षु बालकृष्ण ने 5187 मीटर ऊंची श्रीखंड महादेव कैलाश की चोटी फतह की

March 11, 2026

निरमंड के पर्वतारोही प्रशिक्षु बालकृष्ण ने 5187 मीटर ऊंची श्रीखंड महादेव कैलाश की चोटी फतह की

रामपुर बुशहर: निरमंड उपमंडल के पर्वतारोही प्रशिक्षु बालकृष्ण ठाकुर ने मार्च माह में ही समुद्र तल से लगभग 5187 मीटर ऊंची श्रीखंड महादेव कैलाश की चोटी फतह कर नया रिकॉर्ड बनाया है। आमतौर पर इस दुर्गम पर्वत पर मई-जून के बाद ही श्रद्धालु और पर्वतारोही पहुंचते हैं, लेकिन इस बार कम हिमपात के कारण बालकृष्ण ठाकुर ने 8 मार्च को ही यहां तक पहुंचने में सफलता हासिल की। इस वर्ष पूरे उत्तर भारत में पिछले साल की तुलना में कम हिमपात हुआ है, जिसके कारण निचले क्षेत्रों में तापमान बढ़ा है और ऊंचे पहाड़ों पर भी बर्फ तेजी से पिघल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका असर आने वाले महीनों में तापमान पर पड़ सकता है और मई-जून में गर्मी पिछले वषों से अधिक बढ़ सकती है।

बालकृष्ण ठाकुर ने बताया कि कम बर्फबारी को देखते हुए उन्होंने इस बार मार्च में ही रैकी करने का निर्णय लिया। वे 8 मार्च को सुबह करीब 2 बजे बाराटी नाला से श्रीखंड महादेव के लिए रवाना हुए। सुबह 5 बजे कालीघाटी पहुंचे और उसके बाद लगभग 9 बजे भीम डवारी पहुंचे। वहां जलपान करने के बाद 10 बजे पार्वती बाग के लिए आगे बढ़े और करीब 11 बजे 75 फीट ऊंचे शिवलिंग के दर्शन किए। पूजा-अर्चना और थोड़े विश्रम के बाद वे वापस लौट आए। इस पूरी यात्रा को पूरा करने में उन्हें कुल 9 घंटे 1 मिनट का समय लगा।

उन्होंने बताया कि इस समय श्रीखंड क्षेत्र में पिछले साल की तुलना में बहुत कम बर्फ है और करीब 4 फीट ही बर्फ बची है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन यात्रा एक माह पहले शुरू करता है, तो भीम डवारी में स्नो ब्रिज के बिना यात्रा करना बेहद कठिन हो सकता है। श्रीखंड महादेव यात्रा उत्तर भारत की प्रमुख धार्मिक यात्रओं में शामिल हैए जिसे हर वर्ष जुलाई माह में श्रीखंड महादेव यात्र ट्रस्ट कुल्लू द्वारा हरी झंडी दिखाकर शुरू किया जाता है। हालांकि कुछ श्रद्धालु आधिकारिक यात्रा से पहले भी भोले बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बालकृष्ण ठाकुर ने लोगों से आग्रह किया है कि फिलहाल इस समय यात्रा का प्रयास न करें। यह केवल रैकी थी, जो बिना प्रशिक्षण के करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

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