
हिमाचल डेस्कः प्रदेश के सभी सीबीएसई और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सरकारी व निजी स्कूलों में अब केवल एनसीईआरटी आधारित पुस्तकों का ही उपयोग कराना अनिवार्य कर दिया गया है। उच्चतर शिक्षा उपनिदेशक की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश कक्षा पहली से जमा दो तक लागू होगा।
आदेश के पीछे कारण
कई स्कूलों में एनसीईआरटी के अतिरिक्त निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें विद्यार्थियों पर थोपने की शिकायतें मिल रही थीं। अभिभावकों ने विभाग को बताया कि स्कूल प्रबंधन हर साल बाहर से अतिरिक्त पुस्तकें और नोटबुक खरीदने के लिए दबाव बनाते हैं, जिससे उनके ऊपर आर्थिक बोझ बढ़ता है। खासकर निजी स्कूलों में महंगे पुस्तक सेटों ने परिवारों को परेशानी में डाल दिया था।
नए निर्देश
शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाते हुए सभी स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि विद्यार्थियों को केवल निर्धारित एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार ही पुस्तकें उपलब्ध करवाई जाएं। किसी भी छात्र या अभिभावक को अतिरिक्त किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यदि कोई स्कूल इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग समय-समय पर स्कूलों की निगरानी भी करेगा।
प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
शिक्षा विभाग के इस निर्णय से अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है क्योंकि उन्हें हर साल किताबों पर हजारों रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे। विद्यार्थियों को भी एक समान पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री मिलने से लाभ होगा। हालांकि निजी प्रकाशकों की किताबों में कई अतिरिक्त शिक्षण गतिविधियां शामिल होती हैं, परन्तु उनसे होने वाला अतिरिक्त वित्तीय और बोझ छात्रों पर नहीं होना चाहिए। उच्चतर शिक्षा उपनिदेशक सोलन, गोपाल चौहान ने पुष्टि की कि इस संबंध में सभी स्कूल प्रमुखों को आदेश दिए जा चुके हैं।