
आज भारत में अंतरिक्ष से लेकर रक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो काम हुए हैं, वे अभूतपूर्व हैं। आज हम चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंच गए हैं। दुनिया की बड़ी कंपनियों में भारतीय लोगों का कोई मुकाबला नहीं है। आज के युवा देश में देश के लिए काम करना चाहते हैं, क्योंकि ऐसा माहौल और इकोसिस्टम देश में तैयार हुआ है। देश में वैज्ञानिक सोच और चिंतन को प्रोत्साहन देने के लिए विद्या भारती शोधांकुर जैसे प्रयासों के माध्यम से अभूतपूर्व कार्य कर रही है।शिक्षा, प्रकृति और प्रगति के समन्वय के लिए शिक्षा महाकुंभ के माध्यम से विद्या भारती जो प्रयास कर रही है, वह प्रशंसनीय है।
विद्या भारती की शिक्षा पद्धति व्यक्तित्व का निर्माण भी करती है, जो व्यक्तिपरक होने के बजाय राष्ट्रपरक और मानवता की सेवा पर केंद्रित है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “हमारी वैदिक परंपरा में शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र निर्माण का साधन है। विकसित भारत की नींव मजबूत और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में है। विज्ञान केवल विषय नहीं, बल्कि सोचने, समझने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने की संस्कृति है। इसलिए हमारी शिक्षा व्यवस्था में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा को बढ़ावा देना आवश्यक है।
इसके लिए एक संतुलित ईकोसिस्टम की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा, “जब हमारी शिक्षा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से युक्त होगी, हमारे शिक्षक नवाचार के प्रेरक होंगे, हमारे विद्यार्थी शोध और समाधान के वाहक होंगे और हमारी तकनीक प्रकृति एवं समाज के कल्याण के लिए काम करेगी, तभी विज्ञानमय भारत, विकसित भारत का वास्तविक आधार बनेगा।”इस दौरान उन्होंने शिक्षा महाकुंभ में आए छात्रों के विभिन्न नवाचारों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
सवालों के जवाब में जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह हताश है। राहुल गांधी की बार-बार फेल हुई लांचिंग से कांग्रेसी अब अराजकता पर उतर आए हैं और देश की संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ अविश्वास का माहौल खड़ा करना चाहते हैं, जबकि वे देश के लोगों का विश्वास खो चुके हैं। कांग्रेस अराजकता फैला रही है और देश के लोग नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के साथ चलना चाहते हैं। हाल में हुए उपचुनाव में भी भाजपा को प्रचंड मतों से जीत मिली है।
उन्होंने कहा कि सत्ता से बेदखल होने वाले दिमागी नक्सली अब अराजकता पर उतर आए हैं और पूरे देश का माहौल खराब करना चाहते हैं। कांग्रेस को देशवासियों ने ठुकरा दिया है। जब जनमत से उन्हें सत्ता नहीं मिली, तो वे देश को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें भाजपा के बारे में बोलने के बजाय अपनी पार्टी और नेताओं पर ध्यान देना चाहिए। उनकी हालत ठीक नहीं है, इसलिए उन्हें बार-बार दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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