Last Updated: October 6, 2026

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नशा मुक्ति केंद्रों की संस्थागत निगरानी और पुनर्वास की गुणवत्ता पर जिला प्रशासन का विशेष फोकस

October 6, 2026

नशा मुक्ति केंद्रों की संस्थागत निगरानी और पुनर्वास की गुणवत्ता पर जिला प्रशासन का विशेष फोकस

शिमला। नशे के विरुद्ध जिला शिमला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे व्यापक अभियान को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला प्रशासन ने जिला में कार्यरत विभिन्न नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों (Drug De-Addiction and Rehabilitation Centres) के संचालकों एवं संबंधित प्रतिनिधियों के साथ आज यहां बचत भवन में बैठक आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने की। बैठक में नशा मुक्ति केंद्रों के संचालकों ने विभिन्न मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा।

नशा मुक्ति केंद्रों के संचालन में नियमों का पालन अनिवार्य

उपायुक्त ने कहा कि नशे के खिलाफ कार्य करने वाले हितधारकों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र सामाजिक क्षेत्र में लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रों के संचालन के लिए निर्धारित नियमों एवं मानकों का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की कोताही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति केंद्र व्यवसाय नहीं बल्कि समाज सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति को नशे से बाहर निकालकर स्वस्थ एवं सम्मानजनक जीवन की ओर वापस लाना आसान कार्य नहीं है। इसलिए ऐसे बच्चों, युवाओं और अन्य प्रभावित व्यक्तियों के प्रति सकारात्मक, संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

नशा मुक्ति केंद्रों में नशे की शिकायतों पर गंभीर चिंता

उपायुक्त ने कहा कि नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार के लिए आने वाले लोगों को नशा उपलब्ध करवाए जाने संबंधी शिकायतें सामने आना गंभीर विषय है। उन्होंने केंद्र संचालकों से कहा कि जिन संस्थानों का उद्देश्य लोगों को नशे की लत से बाहर निकालना है, वहां इस प्रकार की शिकायतों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। केंद्रों में सुरक्षित एवं नशा मुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक माता-पिता के लिए उनके बच्चों से बढ़कर कुछ नहीं होता। अभिभावक अपने बच्चों का जीवन बचाने और उन्हें सामान्य जीवन में वापस लाने की उम्मीद के साथ नशा मुक्ति केंद्रों में भेजते हैं। ऐसे में केंद्रों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

उपचार के साथ पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर जोर

अनुपम कश्यप ने कहा कि नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल नशा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है बल्कि नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति का उपचार, परामर्श, पुनर्वास और परिवार एवं समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि “Rehabilitation is not the end of treatment — it is the beginning of a new life.” उपचार के बाद भी व्यक्ति को परिवार, शिक्षा, कौशल, रोजगार और समाज से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है, ताकि वह दोबारा नशे की ओर न लौटे और आत्मसम्मान के साथ सामान्य जीवन जी सके।

नशा मुक्ति एवं पदार्थ उपयोग विकार उपचार केंद्रों के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने नशा मुक्ति एवं पदार्थ उपयोग विकार उपचार केंद्रों के संचालन के लिए निर्धारित न्यूनतम मानकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपचार सुविधाओं को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

डॉ कुशाल वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रेणी-I में एक माह से कम अवधि के अल्पकालिक उपचार एवं डिटॉक्सिफिकेशन केंद्र शामिल है, जहां ओवरडोज, विड्रॉल, क्रेविंग एवं रिलैप्स का प्रबंधन किया जाता है। श्रेणी-II में एक माह या उससे अधिक अवधि के दीर्घकालिक उपचार एवं पुनर्वास केंद्र शामिल है, जहां विदड्रॉल के बाद उपचार, क्रेविंग एवं रिलैप्स प्रबंधन, काउंसलिंग तथा व्यावसायिक पुनर्वास की सुविधा होनी चाहिए। श्रेणी-III में ऐसे उपचार केंद्र शामिल है, जहां नशे की समस्या के साथ प्राथमिक मनोरोग संबंधी बीमारी का भी उपचार किया जाता है।

प्रशिक्षित चिकित्सक और काउंसलर की उपलब्धता अनिवार्य

उपचार केंद्रों में प्रशिक्षित चिकित्सक तथा आवश्यकता के अनुसार मनोचिकित्सक की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। ओवरडोज के मामलों में चिकित्सक की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। महिला मरीजों एवं नाबालिगों के लिए क्रमशः स्त्री रोग विशेषज्ञ तथा बाल रोग विशेषज्ञ की ऑन-कॉल सुविधा का प्रावधान है।

प्रत्येक 30 मरीज पर कम से कम एक पूर्णकालिक काउंसलर होना चाहिए। काउंसलर के लिए क्लिनिकल साइकोलॉजी, साइकोलॉजी अथवा सोशल वर्क में स्नातक योग्यता तथा नशा मुक्ति सेवाओं में छह माह का अनुभव निर्धारित किया गया है।

मरीजों का पंजीकरण और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य

प्रत्येक मरीज का पंजीकरण कर उसे यूनिक आईडी प्रदान करना अनिवार्य है। मरीज का असेसमेंट, लिखित सहमति, चिकित्सक की प्रिस्क्रिप्शन, दवाओं से संबंधित रिकॉर्ड, मनोसामाजिक हस्तक्षेप तथा डिस्चार्ज समरी सहित आवश्यक अभिलेख सुरक्षित रखने होंगे। रिकॉर्ड मैनुअल अथवा डिजिटल माध्यम से रखा जा सकता है, लेकिन मरीज की गोपनीयता मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 (Mental Healthcare Act, 2017) के प्रावधानों के अनुरूप सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।

बिना चिकित्सकीय एवं मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन के भर्ती नहीं

निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार किसी भी व्यक्ति को चिकित्सकीय एवं मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन के बिना नशा मुक्ति उपचार केंद्र में भर्ती नहीं किया जाएगा। मूल्यांकन की रिपोर्ट मरीज की फाइल के साथ संलग्न करना आवश्यक होगा। नशे की समस्या वाले व्यक्ति को भर्ती करने के लिए मरीज अथवा उसके प्रथम श्रेणी के परिजन से लिखित सहमति प्राप्त करना आवश्यक है तथा भर्ती प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप संचालित करनी होगी।

डब्ल्यूएचओ प्रोटोकॉल के अनुरूप उपचार पर जोर

डिटॉक्सिफिकेशन, क्रेविंग एवं दीर्घकालिक रिलैप्स प्रबंधन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुशंसित उपचार प्रोटोकॉल अपनाने पर जोर दिया गया। गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित पुनर्वास केंद्रों को भी संबंधित कानूनी प्रावधानों एवं निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। केंद्रों में बच्चों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों तथा अन्य संवेदनशील वर्गों की आवश्यकताओं के अनुरूप जेंडर एवं आयु-संवेदनशील व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

यदि किसी केंद्र में बच्चों को देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले मामलों में सेवाएं प्रदान की जाती हैं, तो संबंधित सेवाएं किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) आदर्श नियम, 2016 (Juvenile Justice Rules, 2016) तथा सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित करनी होंगी।

सुरक्षा, स्वच्छता और शिकायत निवारण व्यवस्था पर विशेष ध्यान

केंद्रों में निर्धारित मानकों के अनुसार सैनिटेशन स्टाफ, सुरक्षा कर्मियों एवं अटेंडेंट की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रयोगशाला सेवाएं इन-हाउस अथवा आउटसोर्स माध्यम से उपलब्ध होना आवश्यक है। मरीजों को भर्ती करते समय उनके अधिकारों, उपलब्ध सेवाओं, नियमों, शुल्क तथा शिकायत निवारण व्यवस्था की पर्याप्त जानकारी देना और इसे केंद्र में प्रमुखता से प्रदर्शित करना भी अनिवार्य है।

केंद्रों की सुविधाओं में करें सकारात्मक बदलाव

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने सभी केंद्र संचालकों से कहा कि वह अपने-अपने केंद्रों की सुविधाओं, उपचार एवं परामर्श व्यवस्था, स्टाफ की भूमिका, रिकॉर्ड संधारण, सुरक्षा व्यवस्था तथा मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता में आवश्यक सुधार करें। उन्होंने कहा कि जिला शिमला के नशा मुक्ति केंद्रों को इस दिशा में ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए जिसकी प्रदेश भर में सराहना हो। जिला प्रशासन द्वारा इन केंद्रों की संस्थागत निगरानी तथा पुनर्वास कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सामूहिक प्रयास से ही बनेगा नशामुक्त समाज – एसएसपी

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी जब नशा बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के साथ-साथ नशे से पीड़ित व्यक्ति के उपचार एवं पुनर्वास के लिए भी समान गंभीरता से कार्य किया जाए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों, नशा मुक्ति केंद्रों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों तथा नागरिक समाज से नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। नशा मुक्ति केंद्रों में अगर नशे का कारोबार पाया जाता है तो एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा केंद्र के मालिक पर चलेगा। इसमें 10 साल तक सजा का प्रावधान है।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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