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हिमाचल प्रदेश में स्नो लेपर्ड की आबादी में बढ़ोतरी; दूसरे राज्यव्यापी आकलन में 83 स्नो लेपर्ड दर्ज

पालमपुर: हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव विंग ने राज्य में दूसरे स्नो लेपर्ड जनगणना के परिणाम जारी किए हैं। इस आकलन में प्रदेश के ऊंचे और दुर्गम क्षेत्रों में स्नो लेपर्ड (हिम तेंदुआ) की आबादी में वृद्धि की पुष्टि हुई है। सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में कुल 83 स्नो लेपर्ड (शावकों के अतिरिक्त) पाए गए हैं, जो वर्ष 2021 के पिछले आकलन (51 स्नो लेपर्ड) की तुलना में वृद्धि को दशार्ता है। यह सर्वेक्षण हिमाचल प्रदेश वन विभाग की वन्यजीव विंग, नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन (एनसीएफ ), स्नो लेपर्ड ट्रस्ट (एसएलटी ) और रॉयल एनफील्ड सोशल मिशन के सहयोग से किया गया।

अध्ययन में लगभग 26,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया गया और छह प्रमुख स्नो लेपर्ड आवासों में बड़े पैमाने पर कैमरा-ट्रैपिंग तकनीक का उपयोग किया गया। इसमें 44 वयस्क स्नो लेपर्ड की पहचान हुई, जिन्हें कुल 262 बार कैमरों में कैद किया गया। सर्वेक्षण में स्नो लेपर्ड का घनत्व 0.16 से 0.53 प्रति 100 वर्ग किलोमीटर के बीच पाया गया। सबसे अधिक घनत्व स्पीति और पिन घाटी के ट्रांस-हिमालयन क्षेत्रों में दर्ज किया गया, जबकि इसके बाद ऊपरी किन्नौर और ताबो क्षेत्र का स्थान रहा।

अमिताभ गौतम, चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन, हिमाचल प्रदेश, ने बताया कि यह अध्ययन भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रलय ( एमओईएफसीसी ) के स्नो लेपर्ड पॉपुलेशन असस्मेन्ट ऑफ इंडिया (एसपीएआई) प्रोटोकॉल के तहत किया गया, जो ग्लोबल स्नो लेपर्ड इकोसिस्टम प्रोटेक्शन प्रोग्राम के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। डा. कौस्तुभ शर्मा, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, जीएसएलईपी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश उन चुनिंदा प्रांतों में शामिल है जिसने स्नो लेपर्ड की दीर्घकालिक निगरानी के लिए तय मॉडल की ओर सफलतापूर्वक कदम बढ़ाया है। दीपशिखा शर्मा, प्रोग्राम मैनेजर, एनसीएफ ने बताया कि ट्रांस-हिमालय क्षेत्र दुनिया के सबसे संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है।

उन्होंने कहा कि इन इलाकों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने के लिए स्नो लेपर्ड और उनके शिकार का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं विज्ञात सिंह, निदेशक, आयशर ग्रुप फाउंडेशन (रॉयल एनफील्ड), ने कहा, कि हिमाचल प्रदेश में स्नो लेपर्ड जनसंख्या आकलन एक ऐतिहासिक पहल है, जो सहयोगी संरक्षण के महत्व को दशार्ती है। यह प्रयास न केवल एक भव्य प्रजाति की निगरानी करता है, बल्कि हिमालय के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा का भी प्रतीक है। इस सर्वे के परिणाम हिमाचल प्रदेश को एक बार फिर देश में स्नो लेपर्ड संरक्षण और वैज्ञानिक वन्यजीव निगरानी में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करते हैं।

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