Last Updated: September 21, 2026

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बोह आपदा पीड़ितों के लिए सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला, घर, पशुधन और फसलों के नुकसान पर मिलेगा मुआवजा

July 27, 2026

बोह आपदा पीड़ितों के लिए सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला, घर, पशुधन और फसलों के नुकसान पर मिलेगा मुआवजा

शिमलाः मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के बोह में बादल फटने की घटना से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बोह में स्थापित राहत शिविर का निरीक्षण किया तथा वहां ठहराए गए प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के घर इस आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें मकान निर्माण के लिए 7.50 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, कपड़े, बर्तन एवं अन्य आवश्यक घरेलू सामान की खरीद के लिए एक लाख की सहायता भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन प्रभावित परिवारों के पास रहने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, उन्हें सरकार आवश्यकतानुसार सरकारी भूमि भी उपलब्ध करवाएगी।

ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जिन परिवारों की गाय या भैंस आपदा में मर गई है, उन्हें 55 हजार प्रति पशु तथा जिनकी बकरियां मरी हैं, उन्हें 15 हजार प्रति बकरी की सहायता राशि दी जाएगी। जिन घरों में बाढ़ या आपदा के पानी से नुकसान हुआ है, उन्हें एक लाख की राहत प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार, क्षतिग्रस्त दुकानों के लिए नुकसान के आधार पर 50 हजार से एक लाख तक की सहायता दी जाएगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें 5 हजार प्रति कनाल के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। जिन परिवारों को अस्थायी रूप से किराए के मकान में रहना पड़ेगा, उन्हें 5 हजार प्रतिमाह किराया सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रभावित परिवारों को छह माह का राशन भी निःशुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने रिडकमार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्तरोन्नत करने की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023-24 की आपदा के दौरान प्रदेश में 23 हजार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए थे और लगभग 500 बहुमूल्य जीवन गवांए थे। प्रदेश सरकार ने 75 हजार से अधिक लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू किया था, जिसकी सराहना नीति आयोग और विश्व बैंक ने भी की थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में 21वें स्थान से पांचवें स्थान पर पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं और आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना तथा उन्हें आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार आपदा की इस घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावित परिवार को स्वयं को अकेला महसूस करने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं हिमाचल प्रदेश के लिए लगातार गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। ऐसे में राज्य सरकार केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर भी कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत से आपदा-रोधी आधारभूत ढांचे के विकास का निर्णय लिया गया है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करते हुए जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार राज्य सरकार ने आपदा राहत नियमों में संशोधन करते हुए प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली सहायता राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इसके अतिरिक्त संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष आपदा राहत कोष का भी गठन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करते हुए 25 परिवारों को 25-25 हजार रुपये तथा 16 अन्य परिवारों को 10-10 हजार रुपये की अंतरिम सहायता राशि जारी की गई है। अब तक 13 राजस्व प्रमाण-पत्र तैयार किए जा चुके हैं तथा प्रभावित परिवारों कोे बोनाफाइड प्रमाण-पत्र जारी किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के पुनःनिर्माण की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने का कार्य भी युद्धस्तर पर जारी है।

मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों में लगे जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा स्थानीय लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सभी के सामूहिक सहयोग से राहत कार्यों को गति मिली है। इस अपादा में घुड़घुं, भंगार और सपेड़ा गांवों के कुल 25 परिवार प्रभावित हुए हैं। इनमें घुड़घुं गांव के 11 मकानों में रह रहे 18 परिवारों के 52 सदस्य, भंगार गांव के एक मकान में रह रहे 3 परिवारों के 16 सदस्य तथा सपेड़ा गांव के 4 मकानों में रह रहे 4 परिवारों के 16 सदस्य प्रभावित हुए हैं। सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सपेड़ा गांव के 13 मकानों को डेंजर जोन घोषित किया गया है।

इस अवसर पर शाहपुर के विधायक एवं उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार, स्थानीय पंचायत प्रधान नीलम कुमारी, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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