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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत 16 करोड़ की अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी : केंद्र सरकार

December 17, 2025

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत 16 करोड़ की अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी : केंद्र सरकार

हमीरपुर: राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने संसद में जल शक्ति मंत्री से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और हिमाचल प्रदेश में जल प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मांगीं। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की 67वीं कार्यकारी समिति की बैठक में किसी अनुसंधान परियोजना को मंजूरी दी है, क्या वैज्ञानिकों के निष्कर्षो को राज्य व जिला स्तर पर क्रियान्वयन योग्य उपायों में बदलने के लिए कोई तंत्र स्थापित किया गया है तथा हिमाचल प्रदेश में जल गुणवत्ता सुधार, बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण और संधारणीय भूजल प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा क्या पहलें की गई हैं।

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इसके जवाब में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने सदन को अवगत कराया कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की 67वीं कार्यकारी समिति की बैठक में अनुसंधान आधारित नदी संरक्षण पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने बताया कि गंगा बेसिन में वैज्ञानिक निष्कर्षों और डेटा आधारित योजना को मजबूती देने के उद्देश्य से कुल पांच अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत लगभग 16 करोड़ रु पए है। मंत्री ने बताया कि इन परियोजनाओं में मुख्य रूप से हिमालयी गंगा स्रोत ग्लेशियरों की निगरानी, गंगा के लिए डिजिटल ट्विन का विकास, उच्च रिजॉल्यूशन सोनार आधारित नदी तल सर्वेक्षण, पेलियो चैनलों के माध्यम से जलभृत प्रबंधन तथा ऐतिहासिक भौगोलिक नदी डेटाबेस का निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इन अनुसंधानों का उद्देश्य नदी संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने यह सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया है कि अनुसंधान केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनके निष्कर्ष जमीनी स्तर पर क्रि यान्वयन योग्य हों। इसके लिए परियोजना कार्यान्वयन एवं संचालन समितियों में केंद्रीय जल आयोग, केंद्रीय भूमिजल बोर्ड, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान सहित विभिन्न संगठनों का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है, ताकि अनुसंधान के व्यावहारिक परिणाम प्राप्त किए जा सकें। हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में मंत्री ने बताया कि यमुना नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए पांवटा साहिब में 11.57 करोड़ रु पए की लागत से इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन तथा 1.72 एमएलडी क्षमता की एसटीपी परियोजना को मंजूरी दी गई थी।

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