
शिमला: अब ठगी भी हाईटेक हो गई है। साइबर अपराधी अब सिर्फ कॉल और मैसेज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्हाट्सएप को हथियार बनाकर न सिर्फ पैसे उड़ा रहे हैं, बल्कि लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर मानसिक रूप से प्रताड़ित भी कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में ठगों ने पेंशन अधिकारी, सीबीआई, आरबीआई और यहां तक कि जज तक बनकर लोगों को चूना लगाया है। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में प्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में 52 फीसदी का उछाल आया है और ठगों ने लोगों को 132 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई है।
सोलन जिले के बाईपास इलाके में रहने वाले पेंशनर नारायण सिंह चौहान को एक व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को पेंशन अधिकारी बताया और बैंक खाते की जानकारी मांगी। विश्वास दिलाने के लिए ठग ने पीड़ित को पंजाब नेशनल बैंक पेंशन कार्ड नाम से एक एप्लिकेशन डाउनलोड करने को कहा। जैसे ही पेंशनर ने यह ऐप इंस्टॉल किया, उसके खाते से 4.90 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गए।
व्हाट्सएप के जरिए ठगी का सबसे चौंकाने वाला मामला बिलासपुर से सामने आया।
एक सेवानिवृत्त सैनिक को ठगों ने 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। ठगों ने खुद को दूरसंचार विभाग, सीबीआई और आरबीआई का अधिकारी बताया। उन्होंने पूर्व सैनिक को झूठे मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए फर्जी कोर्ट की कार्यवाही दिखाई। एक नकली जज ने उन्हें संपत्ति और पैसा जमा करने का आदेश दिया। डर के मारे पीड़ित ने 15 दिसंबर से 30 दिसंबर 2025 के बीच विभिन्न खातों में कुल 98 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। साइबर ठगी के तरीके अब और खतरनाक हो गए हैं। अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक वीडियो बनाकर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। शिमला में एक बुजुर्ग के खाते से महज एक फोन कॉल के जरिए 10 लाख रुपए गायब हो गए।
पीड़ित के मुताबिक, उन्होंने न कोई ओटीपी शेयर किया और न ही किसी लिंक पर क्लिक किया। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठग कॉल फारवर्डिग और वॉयस क्लोनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे पीड़ित को फोन करके कोई कोड नंबर डायल करने को कहते हैं, जिससे कॉल और मैसेज दूसरे नंबर पर फारवर्ड हो जाते हैं और ओटीपी चोरी कर खाते खाली कर दिए जाते हैं। हिमाचल, उत्तराखंड समेत पूरे हिमालयी क्षेत्र को इन ठगों ने सॉट टारगेट बना लिया है।