
Hingoli Earthquake: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में गुरुवार सुबह फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करके इसकी जानकारी दी।
एनसीएस के अनुसार, भूकंप गुरुवार सुबह 04:58:32 बजे आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.9 मापी गई। भूकंप का केंद्र हिंगोली में था, जिसका अक्षांश 19.498 उत्तर और देशांतर 77.217 पूर्व रहा। इसकी गहराई 5 किलोमीटर दर्ज की गई।
इसी महीने आए दो भूकंप
हाल ही में 3 अक्टूबर को भी हिंगोली जिले में दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। सुबह करीब 7:46 बजे रिक्टर स्केल पर 3.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। भूकंप का केंद्र हिंगोली जिले के गढाला गांव के बाहरी इलाके में लगभग 7 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
लोगों में भय का माहौल
भूकंप के बाद कुछ समय के लिए नागरिकों में भय का माहौल छा गया था। हालांकि, इस भूकंप से किसी के जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं आई थी।
तीव्रता कम होने नहीं हुआ कोई नुक्सान
पिछले कुछ दिनों से हिंगोली जिले में लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। जुलाई में भी इसी तरह का हल्का भूकंप महसूस किया गया था। भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी बड़े नुकसान की कोई खबर नहीं थी।
इससे पहले बीते महीने 26 सितंबर को महाराष्ट्र के पालघर जिले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 मापी गई थी। भूकंप रात 10 बजकर 33 मिनट 46 सेकंड पर आया था, जिसका केंद्र जमीन से लगभग 5 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
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फाल्ट लाइनों के किनारे होने से बार-बार आते है भूकंप
बता दें कि हिंगोली और उसके आसपास का इलाका किन्नेरसरी गोदावरी फाल्ट (केजीएफ) जैसी प्रमुख भूगर्भीय फाल्ट लाइन के नजदीक स्थित है। इन फाल्ट लाइनों के किनारे जमीन के नीचे चट्टानों में जो टेक्टोनिक तनाव जमा होता है, उसके अचानक खिसकने से बार-बार झटके महसूस होते हैं।
5 से 10 KM होती है गहराई
हिंगोली में आने वाले ज्यादातर भूकंप जमीन से लगभग 5 से 10 किलोमीटर की कम गहराई पर दर्ज किए जाते हैं। केंद्र उथला होने के कारण कम तीव्रता (जैसे 2.5 से 4.7 के बीच) वाले झटके भी सतह पर काफी स्पष्ट और तेज महसूस होते हैं।
इस क्षेत्र में लंबे समय से छोटे और मध्यम तीव्रता के झटकों का सिलसिला चल रहा है, जिसे ‘अर्थक्वेक स्वार्म’ कहा जाता है। इसमें बिना किसी एक बहुत बड़े भूकंप के, कम समय के अंतराल में कई छोटे-छोटे झटके आते रहते हैं।