
Hooda lashes out at privatisation of electricity : चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के प्रस्ताव पर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को सौंपने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे जनहित और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस फैसले से आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और प्रदेश की बड़ी आबादी ऊर्जा संकट की चपेट में आ सकती है।
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को कृषि उपभोक्ताओं के लिए अलग से एग्री डिस्काम शुरू किया जा रहा है, जिससे कि निजी कंपनी को किसानों को बिजली आपूर्ति न करनी पड़े। कारण यह कि किसानों को सब्सिडी मिलती है। वैसे भी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के कुल राजस्व का लगभग एक-तिहाई राजस्व गुरुग्राम से प्राप्त होता है। इस क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने से राजस्व का भारी नुकसान होगा, जो निगम के आर्थिक स्थिति को बिगाड़ने का काम करेगा।
उन्होंने कहा कि खतरा इस बात का भी है कि प्राइवेट कंपनियां सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने के बजाय औद्योगिक क्षेत्र, माल, कामर्शियल और शहरी इलाकों में ही ज्यादा बिजली आपूर्ति करेंगी। घरेलू ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों व गरीब उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति आपूर्ति का काम दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के पास रहेगा, जोकि बिना राजस्व के संभव नहीं होगा।
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