Last Updated: November 6, 2026

Dainik Savera Times Logo

17 साल बाद उम्मीद! लालू ने रखी थी नींव, अब रेल लाइन को रफ्तार देगी मोदी सरकार

June 16, 2026

17 साल बाद उम्मीद! लालू ने रखी थी नींव, अब रेल लाइन को रफ्तार देगी मोदी सरकार

Hope after 17 years for Railway Line : किशनगंज। करीब 17 साल से अधर में लटकी जालालगढ़-किशनगंज नई रेल लाइन परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। सीमांचल के ग्रामीण इलाकों को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का शिलान्यास वर्ष 2008-09 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था।

लागत 360 से बढ़कर 1852 करोड़

उस समय इसकी लागत 360 करोड़ आंकी थी, लेकिन अब संशोधित लागत बढ़कर 1852 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। तकनीकी और बजटीय अड़चनों के कारण लंबे समय से ठप पड़ी इस परियोजना को अब मोदी सरकार गति देने की तैयारी में है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और विकास को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। करीब 17 सालों में भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत में वृद्धि के कारण अब परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 1852 करोड़ रुपये के करीब हो गई है। प्रस्तावित रेल लाइन की कुल लंबाई 51.632 किलोमीटर होगी। यह रेल मार्ग पूर्णिया के जलालगढ़ जंक्शन से शुरू होकर अमौर, बैसा, रौटा, खाताहाट, महीनगांव, दौला जैसे क्षेत्रों से गुजरेगा और किशनगंज मुख्यालय तक पहुंचेगा।

यात्रियों के लिए बनेंगे 8 रेलवे स्टेशन

इस पूरे खंड में यात्रियों की सुविधा के लिए आठ नए रेलवे स्टेशन बनाने की योजना है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के पूरा होने के बाद न्यू जलपाईगुड़ी से कटिहार जाने वाली ट्रेनों के लिए एक वैकल्पिक और अपेक्षाकृत छोटा मार्ग उपलब्ध होगा। इससे वर्तमान में अत्यधिक व्यस्त मुकुरिया-किशनगंज रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव कम होगा। परियोजना से यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन में सुधार आएगा। पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक क्षेत्र के समानांतर यह एक वैकल्पिक रेल संपर्क उपलब्ध कराएगी।

रणनीतिक कवच साबित होगी ये रेललाइन

इस रेलवे लाइन का निर्माण हो जाने से आपातकालीन परिस्थितियों में सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए यह मार्ग रणनीतिक कवच साबित हो सकता है। अमौर और बैसा जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को इस रेल लाइन से सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। महानंदा और कनकई नदी की बाढ़ से प्रभावित इन इलाकों के किसान अपनी मक्का, जूट और धान जैसी फसलों को अब आसानी से सिलीगुड़ी, कोलकाता और दिल्ली की बड़ी मंडियों तक पहुंचा सकेंगे। वहीं, सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में रेल संपर्क बेहतर होने से स्थानीय व्यापार को नई गति मिलेगी, परिवहन लागत घटेगी और सीमांचल क्षेत्र के आर्थिक विकास को नया आधार मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों से भी बढ़ेगी कनेक्टिविटी

इस नए रेल खंड के निर्माण से जहां सुरक्षा की दृष्टि से वैकल्पिक रेलवे रूट बनेगा, वहीं सुदूर ग्रामीण क्षेत्र को रेलवे कनेक्टिविटी सुविधा मिल जाएगी। दरअसल, तत्कालीन किशनगंज सांसद मरहूम तस्लीमुद्दीन के पहल से तत्कालीन यूपीए सरकार के समय इस परियोजना को हरी झंडी मिली थी, लेकिन तत्कालीन रेल मंत्री के शिलान्यास के कुछ दिनों के बाद इस परियोजना में ग्रहण लग गया था और 17 साल तक इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पाया।अब केंद्र सरकार ने परियोजना को रिवाइज कर राशि देने की घोषणा की है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि किशनगंज-जलालगढ़ के बीच नई रेल लाइन बिछाने को लेकर कार्य चल रहा है। रेल मंत्रालय जल्द ही इस दिशा में काम शुरू होगा।

Also Read :

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें