Last Updated: November 4, 2026

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पाकिस्तान जाने वाले पानी को भारत अकेले कैसे रोक सकता है? जानें वजह

April 24, 2025

पाकिस्तान जाने वाले पानी को भारत अकेले कैसे रोक सकता है? जानें वजह

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कई बड़े फैसले लिए हैं। इन्हीं में से एक बड़ा फैसला है, सिंधु जल समझौते को निलंबित करने का निर्णय। इस फैसले के बाद देश भर में बहस तेज हो गई है कि क्या भारत एकतरफा इस समझौते को खत्म कर सकता है और पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोक सकता है।

सिंधु जल समझौता एक स्थायी संधि है, जिसे कोई भी देश अकेले अपनी मर्जी से रद्द नहीं कर सकता। इसे रद्द करने के लिए दोनों पक्ष की सहमति जरूरी है। हालांकि, वियना संधि के लॉ ऑफ ट्रीटीज की धारा 62 इस स्थिति में कुछ राहत प्रदान करती है। इस धारा के तहत यदि संधि की मूल परिस्थितियों में बुनियादी बदलाव हो जाए, तो कोई भी देश इससे पीछे हट सकता है। भारत का तर्क है कि पाकिस्तान बार-बार आतंकी गुटों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर रहा है।

वियना समझौते की धारा 62 के अनुसार, यह एक वैध कारण हो सकता है जिससे भारत सिंधु जल समझौते से हटने की बात कह सकता है। इंटरनेशनल कोर्ट ने भी पूर्व में कहा है कि अगर मौजूदा स्थितियों में कोई बदलाव हो तो कोई भी संधि रद्द की जा सकती है। ऐसे में माना जा रहा है कि भारत इसी कानून का हवाला देते हुए अपने रुख को मजबूत बना रहा है।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने गुरुवार को ही समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि पाकिस्तान को झटका देने के लिए सिंधु जल समझौते को निलंबित करना जरूरी था। खासकर 1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल समझौता, जो बहुत एकतरफा था, जिसमें पाकिस्तान को 70 प्रतिशत पानी, यानी सिंधु बेसिन की मुख्य नदियां, सिंधु, चिनाब और झेलम का हिस्सा दिया गया, जबकि पंजाब की तीन नदियां भारत के हिस्से में आईं। भारत ने दरियादिली दिखाई और अधिकतम पानी पाकिस्तान को दिया, लेकिन पाकिस्तान इसे हमारी कमजोरी समझता है। समझौते में एक प्रावधान है कि कोई भी पक्ष असंतुष्ट होने पर इससे बाहर निकल सकता है। चूंकि पाकिस्तान सभ्य तरीके से नहीं समझता, इसलिए उसे इस तरह का झटका देना जरूरी है।

उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान का पानी बंद होगा, पानी का प्रवाह रोका जाएगा, और इसके लिए कदम उठाए जाएंगे। इसका असर आने वाले दिनों में दिखेगा। पाकिस्तान में कृषि, सिंचाई, बिजली उत्पादन प्रभावित होगा और पीने के पानी की किल्लत होगी। पाकिस्तान के काले कारनामों का असर उनके लोगों को दिखाना चाहिए ताकि उन पर दबाव पड़े।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि के तहत, रावी, सतलुज और ब्यास नदी का औसत जल लगभग 33 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) भारत को विशेष उपयोग के लिए आवंटित किया गया था। वहीं, पश्चिमी नदियों, सिंधु, झेलम और चिनाब का औसत जल लगभग 135 एमएएफ पाकिस्तान को आवंटित किया गया था, सिवाय संधि में भारत को दिए गए निर्दष्टि घरेलू, गैर-उपभोग्य और कृषि उपयोग के लिए।

बता दें कि सिंधु जल समझौता साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वल्र्ड बैंक की मध्यस्थता में हुआ था। इसके तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) का पानी मिला, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) का पानी मिला।

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